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Wednesday, February 21, 2024
पाठकों के लेख एवं विचार*दीनानाथ_शास्त्री_जी_थे_ईमानदारी_की_उत्कृष्ट_मिसाल* लेखक महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार*

*दीनानाथ_शास्त्री_जी_थे_ईमानदारी_की_उत्कृष्ट_मिसाल* लेखक महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार*

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17 जनवरी 2024– (#दीनानाथ_शास्त्री_जी_थे_ईमानदारी_की_उत्कृष्ट_मिसाल)-

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द्रंग विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे आदरणीय दीनानाथ शास्त्री अपने जीवन की अगली यात्रा के लिए निकल गए है। सोमवार को उनका निधन हो गया। वह 1990 मे मेरे साथ ही विधानसभा के लिए चुन कर आए थे। वह अपनी ईमानदारी, संघर्षशील जीवन और सिद्धांतों के लिए जाने जाते थे। स्मरण रहे शास्त्री जी ने 1990 में द्रंग के दिग्गज कांग्रेस नेता ठाकुर कौल सिंह को हराकर चुनाव जीता था। राजनिति मे आने से पहले वह अध्यापन का कार्य करते थे। वह अध्यापक यूनियन के दमदार नेता भी रहे। मुझे स्मरण है कि उन्होने अपने छोटे से विधानसभा सदस्य काल खंड मे एक प्रखर वक्ता की छवि बना ली थी। वह एक निजि प्रस्ताव विधानसभा मे लेकर आए और मंडी को प्रदेश की राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा। भाजपा की मुख्य धारा से हाशिये पर चले जाने के बाद भी वह पुराने साथियों से पत्र व्यवहार कर हिमाचल की चिंता करते थे। वह सन 2000 तक पत्राचार के लिए पोस्ट कार्ड और अन्तर्देशीय का प्रयोग करते थे। अपने पत्रों मे अक्सर वह राजनीति मे पैसे और पैसे वालो के बढ़ते प्रभाव पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते थे।

लगभग एक दशक से शास्त्री जी मेरे सम्पर्क मे नहीं थे। आज उनके निधन का समाचार पढ़ने के बाद मैने उनके द्वारा दी गई उत्कृष्ट मिसाल को अपने पाठकों के साथ सांझा करने का निर्णय लेते हुए यह ब्लॉग लिखा है। आज के समय मे जब पैसे और स्वार्थ का बोलबाला है लेकीन शास्त्री जी की यह बड़ी बात है कि वह दो पेंशन लेने के अधिकारी थे। एक बतौर पूर्व विधायक और दूसरी सेवानिवृत्त अध्यापक की, लेकिन उन्होने केवल एक ही पेंशन पूर्व विधायक की लेना स्वीकार की थी। उनका यह तर्क था की पेंशन केवल गुजारा भत्ता है न कि ऐशो आराम की जिन्दगी के लिए प्रिवी पर्स है। उनका कहना था कि मेरी आत्मा डबल पेंशन लेने की अनुमति नहीं देती है। हालांकि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। दूसरी ओर मै ऐसे राजनेताओं से परिचित हूँ जो दो नहीं तीन- तीन पेंशनो के हकदार है और लेते भी है। आज के युग मे शास्त्री जी जैसे ईमानदार और सिद्धांतवादी नेता अपवाद मात्र है उन्हे द्रंग का लाल बहादुर शास्त्री भी कहा जा सकता है। उनके चले जाने के बाद जो रिक्तता आएगी उसे भरना मुश्किल है। मै उनकी ईमानदारी और उनके संघर्ष को प्रणाम करते हुए उनको अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

Mohinder Nath Sofat Ex.Minister HP Govt.

#आज_इतना_ही।

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