प्राइवेट स्कूल पेरेंट एसोसिएशन शिमला ने सरकार से फैसला वापस लेने की उठाई मांग
छोटे बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं अभिभाव शिमला Ajay Bhatti
private school parent Association ने कहा – ऑफलाइन और • ऑनलाइन दोनों विकल्प दें सरकार
मांग पूरी न होने पर कोर्ट जाने की दी चेतावनी
शिमला, 12 नवंबर प्रदेश सरकार द्वारा स्कूलों में सभी कक्षाओं को शुरू करने का विरोध बढ़ने लगा है। प्राइवेट स्कूल पेरेंट एसोसिएशन शिमला ने सरकार से छात्रों के ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों विकल्प देने और छोटे बच्चों को स्कूल बुलाने के कैबिनेट के फैसले को वापस लेने की मांग की है। अब जब कि 15 नवंबर को पहली और दूसरी के बच्चों की भी नियमितफैसला तो ले लिया है, लेकिन इस है कि स्कूल प्रबंधनों द्वारा कोरोना में पेरेंट एसोसिएशन डीसी से मिले है संक्रमण से बचाव के लिए क्या व्यवस्थाएं की है।
फैसले का अभिभावक विरोध कर रह है। अभिभावकों के मन में अपने बच्चों की 1 सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल है, प्रदेश सरकार ने आठवीं बारहवी कक्षा की नियमित कक्षाएं शुरू की है, जिसका अभिभावकों ने स्वागत किया, लेकिन 5 साल के छोटे बच्चों के लिए यह फैसला अभी ठीक नहीं हैं। सरकार को कोविड-19 के पूरे तरह खत्म होने का इंतजार करना चाहिए, तब तक ऑनलाइन क्लास जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने किस आधार पर यह फैसला लिया इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। अभिभावकों को जानने का अधिकार है।
उन्होंने मांग की अभिभावकों को तय करने की छूट दी जाए कि वह अपने बच्चों स्कूल भेजना चाहते है या नहीं। उन्होंने प्रदेश सरकार से कैबिनेट के फैसले में संशोधन करने या वापस लेने की मांग की है और कहा कि यदि फिर भी सोमवार से छोटे बच्चों के लिए स्कूल खोले जाते हैं तो पेरेंट एसोसिएशन कोर्ट जाएगी। साथ ही उन्होंने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए कोविड टीकाकरण कार्यक्रम जल्द शुरू करने की भी मांग की। इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य अनिल गोयल ने कहा कि इस संबंधऔर कुछ प्राइवेट स्कूलों के आफलाइन कक्षाएं शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि स्कूल स्टाफकी वेतन बढ़ौतरी का हवाला देकर पूरी फीस ले रहे है, ऐसे में श्रम आयुक्त को स्कूलों का निरीक्षण कर जांच करनी चाहिए। इसके अलावा पेरेंट एसोसिएशन के सदस्य अभिभावक संदीप वर्मा और रीना ने कहा कि बच्चों को सिर्फ 10 से 15 दिन के लिए स्कूल बुलवाने का फैसला तर्क संगत नहीं है, वह कोविड-19 के चलते अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते। साथ ही अभिभावकों को सिर्फ ट्यूशन फीस लिए जाने की भी मांग की।
मुख्यमंत्री ने जमनालाल
शिमला प्रेसक्लब में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते प्राइवेट स्कूल पेरेंट एसोसिएशन
कक्षाएं शुरू होने वाली है। पेरेंट एसोसिएशन ने साफ कहा है कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नही लेती तो पेरेंट एसोसिएशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
उधर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन में कहा है कि उन्हें स्कूल में हर तरह के खर्चे वहन करने पड़ रहे हैं उनके ना तो बिजली के बिल कम हो रहे हैं तथा ना ही उनका भवन का किराया कम हो रहा है और ना ही वह अध्यापकों तथा अन्य स्टाफ की सैलरी काट सकते हैं उनकी लोन की किस्त मे भी नियमित रूप से बढ़ती जा रही हैं। उनके खर्चे जस के तस हैं उन्हें रोड टैक्स भी देना पड़ रहा है तथा साथ ही इंश्योरेंस और ट्रांसपोर्ट पर अन्य खर्चे भी देने पड़ रहे हैं। कई स्कूलों ने तो अपने ट्रांसपोर्ट के ड्राइवर और कंडक्टर रोको पूरी तनख्वाह दी है जबकि बसे लगभग पिछले पौने 2 साल से सड़क पर नहीं उतरी हैं ।अगर बसें चल ही नहीं रही हैं तो वह इंश्योरेंस और ट्रांसपोर्ट पर अन्य टैक्स किस लिए दें? सरकार को उनकी सहायता करनी चाहिए ।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वह स्कूल को चलाकर सरकार की सहायता कर रहे हैं शिक्षा में अपना योगदान दे रहे हैं। सरकार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, तो सरकार उनके प्रति उदासीन क्यों हैं? क्यों उन्हें इंश्योरेंस और टैक्स से छूट नहीं दी जा रही? जबकि वह लोग इस राष्ट्रीय आपदा में सरकार की हर तरह से सहायता कर रहे है,अभिभावकों तथा बच्चों का ख्याल रख रहे हैं ,तो सरकार को भी चाहिए कि सरकार प्राइवेट स्कूलों का भी ध्यान रखें ,और उनकी अधिक से अधिक सहायता करें ,ताकि वह भविष्य में भी अपने संस्थानों को सुचारू रूप से चला सके कहीं ऐसा ना हो कि प्राइवेट स्कूल एकदम बंद होने के कगार पर पहुंच जाएं और उन्हें कोई और अन्य रास्ता ना दिखाई दे।