हिमाचल में रोजगार

उमेश बाली ट्राइसिटी टाइम्स
हिमाचल एक ऐसा राज्य है जहां की जनसंख्या तुलनात्मक रूप से कम है । बेरोजगारी फिर भी समस्या है ।वास्तव में साधनों का उपयोग सही ढ़ंग से नहीं हुआ ।जो निजी क्षेत्र निवेश करना भी चाहता भी है वो परिवहन महंगा होने के कारण पीछे कदम खींच लेता है ।रेल नेटवर्क नहीं के बराबर है जो ढुलाई का कार्य कर सके ।यह ठीक है कुछ सीमेंट के कारखानों से रोजगार और कुछ बिजली क्षेत्र में भी हुआ सृजन हुआ है ।इसके इलावा कुछ इलाकों में मछली पालन ने भी योग दान दिया है और टूरिज्म ने भी ।लेकिन बात वहीं की वहीं आ कर रुकती है कि साधनों का विकास और उपयोग को दिशा नहीं मिली ।कुछ कोशिशें भी हुई लेकिन ऊंट के मुंह में जीरे की तरह ।हिमाचल में सबसे बड़ी समस्या पढ़े लिखे एमबीए इंजीनियर्स या दूसरे व्यवसायिक युवाओं को रोजगार के लिए अन्य राज्यों की तरफ देखना पड़ता है ।मेरे विचार अनुसार हिमाचल में जड़ी बूटियों ,टूरिज्म और बिजली क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।दूसरी तरफ आईटी जैसी कंपनियों के लिए या इलेक्ट्रॉनिक में भी संभावनाएं हो सकती है क्योंकि पर्यावरण की दृष्टि से हिमाचल स्वर्ग है । सरकार को सबसे पहले ब्रॉडगेज लाइन से हिमाचल को बाकी राज्यों से जोड़ना होगा इससे सदूर दक्षिण से सीधे लोगो को आने में बहुत आसानी होगी और रेक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार में बहुत बड़ा साधन उपलब्ध करवा सकती है । सरकार को अपना निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी से नए पर्यटन स्थल निर्माण करने चाहिए ।यह एक बहुत बड़ा परिवर्तन रोजगार के क्षेत्र में ला सकता है ।
बिजली के छोटे प्रोजेक्ट की तरफ युवाओं का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है और इंजीनियर युवा जो उद्यमी ही इस क्षेत्र में और एमबीए या मैनेजमेंट वाले होटल व्यवसाय की तरफ बढ़ सकते है ।इसी तरह फार्माकोलॉजी में पारंगत युवा हर्वल आधारित उत्पादन में हाथ आजमा सकते है ।
फलों पर आधारित कुछ उद्योग स्थापित हो सकते है । शिक्षा के क्षेत्र में भी अवसर खोजे का सकते है। प्लस टू के बाद जहां बच्चे बाहर के राज्यों में कोचिंग लेने जाते है उनके लिए हिमाचल में भी साधन उपलब्ध होने चाहिए युवाओं को कोसल विकास की तरफ आकर्षित करना बहुत आवश्यक है ।प्लम्बर , वेल्डर ,मैकेनिक ,इलेक्ट्रीशियन ,तकनीशियन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है ।
युवाओं को निवेश के लिए धन कम ब्याज दरों पर उपलब्ध करवाने चाहिए ताकि वो आसानी से चुका सकें और ऋण प्रोजेक्ट पर आधारित होने चहिए उसके लिए उद्यमी लोगो को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के लिए अलग मंत्रालय और विभाग होना चाहिए और उद्यमी युवाओं के प्रोजेक्ट्स की निगरनी के लिए । घाटे को स्थिती में आर्थिक सलाहकार होने चाहिए जहां युवा सलाह ले सके ।
सरकार को त्वरित रूप से युद्ध स्तर पर कार्य करना चाहिए । मै तो यहां तक सोचता हूं कि बेशक युवाओं को स्वरोजगार के लिए जमीन अधिग्रहण भी करनी पड़े तो सरकार करे और काम करने वाले युवाओं को दे बेशक किराया ले ।जो कृषि योग्य जमीन तीन साल से उपयोग में ना लाई गई हो उसे भी युवाओं को कृषि और पशु पालन के लिए दे देना चाहिए ।
Tri City times media यह उम्मीद करता है कि सरकार इस विषय पर अवश्य गंभीरता से सोचेगी