देश और राजनीति :umesh bali tct
umesh bali tct

देश और राजनीति
मुझे हैरानी और दुख इस बात का है कि देश की समस्यायों की तरफ विपक्ष या आंदोलनकारी बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे है ।जब सरकार ने बिल वापिस ले लिए जिसे विपक्ष भी चाहता था और किसान भी तो उन पर कैसी चर्चा चाहते है नेता लोग ।रही टिकैत साहब की बात तो उन्हें 26 जनवरी की धमकी नहीं देनी चाहिए जब उनकी सबसे बड़ी मांग सरकारी ने मान ली और आज़ादी के बाद देश में यह पहली बार हुआ है ।जिस एमएसपी की बात किसान और विपक्ष कर रहा है वो तो फिलहाल जारी है और इस पर कानून बनाने के लिए हर पहलू पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है क्योंकि अमेरिका एमएसपी कानून फेल हो चुका है बहुत साल पहले ।किसानों खास कर छोटे किसानों की समस्याएं है जिन पर सरकार को अधिक ध्यान देना ही होगा और खास कर उन किसानों पर जिनमे पास वैकल्पिक आय के स्रोत नहीं है ।
अब राजनीति की बात करूं तो देश महमारी ,चीन , आंतकवाद , अलगाववाद आदि खतरों से जूझ रहा है ।देश को तीन तीन फ्रंट पर जंग लड़नी है जब की इस समय जनता भी इतनी गंभीर नहीं है इन मुद्दों पर ।विपक्ष को सवाल खड़े करने चाहिए लेकिन माइलेज लेने के लिए नहीं देश के हित के लिए । माइलेज या लाभ तो जनता खुद दे देती है , बस यही विपक्ष गलत हो जाता है जल्दबाजी अधीरता में ।विपक्ष की गहन इच्छा सत्तासीन होने की है जब की देश के संवेदनशील वर्ग को। देश की चिंता है ।विपक्ष और किसान नेताओ को समझना चाहिए कि से बहुत लंबे समय तक सड़कों को बन्द नहीं कर सकते क्योंकि यह केवल आपकी राजनीति का नहीं देश का मसला है। विपक्ष को रचनात्मक भूमिका में आना होगा ।कम से कम देश कुछ मामलों में तो पक्ष और विपक्ष को उसी तरह एक जुट देखना चाहता है जैसे 1971 में था या नरसिम्हा सरकार में था । मै आम नागरिक विपक्ष से यह अपील करता हूं कि अपनी राजनीति के लिए किसान आंदोलन को हथियार ना बनाए और दवाब को राजनीति में ऐसा कोई कार्य ना करे जिससे देश को नुकसान हो । सरकारें और सत्ता कभी भी परिवर्तित जो
हो जाती है ।कोई भी राजनीतिक दल अगर यह सोचता है हर जिम्मेदारी सरकारी की है तो गलत है हर राजनीतिक दल , नेता और नागरिक कर्तव्यों से विमुख नहीं हो सकता संविधान के अनुसार ।देश बचेगा तो हम बचेंगे इस लिए पहले देश को संभालिए देश आपको सम्भाल लेगा .