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एक ज्वलंत प्रश्न क्या medical profession अथवा डॉक्टरों का इंजीनियरों वाला हाल होने वाला है

प्रशिक्षु डॉक्टरों का सवाल हर साल निकलेंगे 890 एम.बी.बी.एस. और पोस्टें केवल 80, 1122 कहां जाएंगे …प्रशिक्ष डाक्टर

21 दिसम्बर प्रदेश में इस समय 7 मैडीकल कालेजों में 890 बच्चे हर वर्ष एम.बी.बी.एस. की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

इसके साथ ही 232 पी.जी. भी अलग से कर रहे हैं। इसमें सोलन कालेज में 150 व अन्य 6 कालेजों चम्बा, टांडा मैडीकल कालेज, नाहन, मंडी, हमीरपुर व शिमला मैडीकल कालेज में 120 विद्यार्थी प्रत्येक कालेज में एम.बी.बी.एस. की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। बिलासपुर के एम्स के नए सत्र की कुछ नई सीटें एम. बी.बी.एस. के लिए रखने की संभावना है।

इस बारे में डा. राजेन्द्र प्रसाद मैडीकल कालेज के कुछ प्रशिक्षु डाक्टरों ने बताया कि इस प्रदेश में लगभग 2400 मैडीकल अधिकारियों की पोस्टें हैं। उन्होंने बताया कि आज की तारीख में केवल 80 सीटें ही एम. ओ. की खाली हैं। प्रशिक्षु डाक्टरों ने कहा कि इस साल 450 नए डाक्टर निकलेंगे जबकि आने वाले 2-3 सालों में

एक हजार जनसंख्या पर एक डाक्टर होना चाहिए।

प्रशिक्षु डाक्टरों का कहना है कि जनसंख्या के अनुपात में हर एक हजार पर एक डाक्टर का होना चाहिए जिसके अनुसार लगभग 6-7 हजार डाक्टरों की पोस्टे बनती है। प्रशिक्षु डाक्टरों का कहना है कि इस समय प्रदेश में ज्यादा प्राइवेट अस्पताल भी नहीं है जहां वे नौकरियां कर सके।

यह किया जा सकता है

प्रशिक्षु डाक्टरों का यह भी कहना है कि इसके लिए जिला व उपमंडलीय स्तर के अस्पतालों में डाक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि मैडीकल कालेजों पर दबाव कम पड़े। उनका यह भी कहना है कि सेवानिवृत्ति की आयु 58 साल ही रखी जाए ताकि नए डाक्टरों को अधिक मौका मिल सके।

890 नए डाक्टर हर साल निकलेंगे तो इन डाक्टरों को कहां नौकरियां मिलेंगी। आई. जी. एम.सी. के छात्रों सहित मैडीकल ऑफिसर एसोसिएशन सरकार को पत्र तक भेज चुकी है। इनकी मांगें हैं कि

निजी यूनिवर्सिटी में यह फीस

महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में एम.बी.बी.एस. कोर्स के लिए वर्ष 2021-22 के लिए फीस स्ट्रक्चर जारी किया गया है। इस संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसके तहत बी.पी.एल. व आई आर डी. पी. वर्ग में एम.बी.बी.एस. की पहले वर्ष की फीस 53, 240 रुपए दूसरे वर्ष की फीस 58,564 रुपए, तीसरे वर्ष की 63,888 रुपए, चौथे वर्ष की फीस 69,212 व अंतिम वर्ष की फीस 74,536 रुपए तय की गई है। यानी उक्त कोटे के तहत एम.बी.बी.एस. की कुल फीस 3, 19,440 रुपए निर्धारित की गई है। इसके अलावा स्टेट कोटे की पाच वर्ष की फीस 50 लाख 82 हजार रुपए तय की गई है। इसमें पहले वर्ष की फीस 8 लाख 47 हजार, दूसरे वर्ष की फीस 9 लाख 31 हजार 700, तीसरे वर्ष की 10 लाख 16 हजार 400, चीचे वर्ष की फीस 11 लाख 1 हजार 100 व अंतिम वर्ष की फीस 11 लाख 85 हजार रुपए 800 होगी। इसके अलावा सरकारी कालेजों में भी लाखों रुपए की फीस देकर एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई उत्तीर्ण की जाती हैं।

कोई पत्र नहीं आया: 1 : निदेशक

वैसे हमारे पास कैडर बढ़ाने को लेकर किसी भी प्रकार का लिखित में कोई पत्र नहीं आया है। सरकार के आदेशानुसार जो कैडर लागू किया गया है उसी कैडर के तहत पद भरे जाते हैं। डाक्टर की रिटायरमैट उम्र को लेकर सरकार के आदेशों के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। डा. रजनीश पठानिया, शिक्षा निदेशक स्वास्थ्य

चिकित्सा अधिकारी के 2400 कैडर हैं। 2021-22 में राज्य के विभिन्न मैडीकल कालेजों से की संभावना है। 450 एम.बी.बी.एस. छात्र पास आऊट होंगे। अगले शैक्षणिक वर्ष से मैडीकल कालेजों से

कैडर बढ़ाने को भेजा है पत्र

हमने सरकार को पहले भी कैडर बढ़ाने को लेकर पत्र भेजा था। प्रदेश में आने वाले समय

में एम.बी.बी.एस. के छात्रों का भविष्य खतरे में हो सकता है। कारण यही है कि एम.बी.बी.एस. की सीटें तो बढ़ाई ही जा रही है और कैडर को नहीं बढ़ाया जा रहा है। अगर एम.बी.बी.एस. की सीटें बढ़ाई है तो उन्हें नौकरी भी मिलनी चाहिए। वहीं डाक्टर की सेवानिवृत्ति उम्र को लेकर भी सरकार गंभीर नहीं है। डाक्टर की सेवानिवृत्ति उम्र को घटाकर 58 साल किया जाना चाहिए ताकि छात्रों के लिए पद खाली हो ।

-पुष्पेंद्र वर्मा, महासचिव, एच.एम.ओ.ए.

एम.बी.बी.एस. पासआऊट की काम करना होता है। वे दूसरी किसी संख्या बढ़कर 950 प्रति वर्ष होने लाइन में जाकर शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते जबकिइंजीनियर व अन्य प्रशिक्षु डक्टरों का यह भी कहना एम.बी.ए. या दूसरी लाइनों में भी है कि एम.बी.बी.एस. करने के बाद चले जाते हैं। ऐसे में 1122 डाक्टर्ज उन्हें आगे इसी लाइन में रहकर क्या करेंगे।

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