Himachal

पाठकों के लेख:: तृप्ता भाटिया

Bksood chief editor

1.Tct
tricitytimes.com

ज़िन्दगी के ड्राइव में कोई फॉरमेट या रिसेट बटन नहीं होता,देर सवेर यदा कदा कुछ अतीत के पन्ने हवा में उड़ते हुए कदमों के पास आ मिलेंगे। अब तय आपको करना है कि उन पन्नो के आगे रुकना है रोना है या वक्त की नब्ज थामे बढ़ते रहना है, क्योंकि अतीत के पन्ने जब महत्वहीन हो जाये तो उनपर आँसू गिराना उतना ही बड़ा पाप है जितना किसी निर्दोष का बेवजह खून बहाना। उन पन्नो में वह रुमानियत बचती ही कहाँ है वह तो कोड़े हर्फ़ है बस..और यह भी तो है कि जो चले गए वो चले गए वह लौटकर नही आएंगे बस पुरवा हवा में जैसे पुराने दर्द बाहर आ जाते ठीक वैसे ही कभी कभी वह याद बनकर आएंगे। तय तो आपको करना है कि बेवजह रोकर आप खुद का और अपनों से जुड़े लोगों को परेशान करंगे,उन्हें मानसिक पीड़ा देंगे या हंसकर उन पन्नो को पैरों तले कुचलकर उन्हें उनकी औकात दिखलायेंगे।
हम रहें न रहें थोड़े से वक़्त में आपके लिए इतना लिख जाएंगे कि तुम्हारी लम्बी सी उम्र भी पढ़ने के लिए कम पड़ जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button