क्या सरकारी संपत्तियों की लोकेशन को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता नहीं है?
BKSood chief editor

हमारे देश और प्रदेश में कुछ सरकारी संपत्तियों की लोकेशन ऐसी है कि वहां पर अगर कोई व्यापारिक गतिविधियां की जाए तो सरकार को रुपएकरोड़ों गई आय हो सकती है और जो सरकारें कर्ज में डूबी हुई है वह उससे उबर सकती हैं।
क्या सरकार को ऐसी संपत्तियों को बेच नहीं देना चाहिए या इन्हें BOT MODE या PPP MODE में देकर सरकार को आय के साधन नहीं जुटाने चाहिए।
चित्र में जो आप भवन देख रहे हैं यह पालमपुर में प्राइम लोकेशन पर पटवार खाने की संपत्ति है ,जो लगभग गिरने के कगार पर है और अगर यह गिरने के कगार पर नहीं भी होती और इसे सरकारी आवास के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो भी इसका किराया कुछ सेंटरों में ही आता परंतु अगर इसी संपत्ति को पीपीपी या ब्यूटी मोड़ पर दे दिया जाए तो प्राइम लोकेशन कि इतनी अधिक कीमत है कि सरकार को सैकड़ों हजारों की इनकम नहीं बल्कि लाखों रुपए प्रतिमाह की इनकम हो सकती है।
इसी तरह से सिविल हॉस्पिटल की बाजार की तरफ जगह खाली पड़ी है जिस पर अगर छोटे-छोटे बूथ बना दिए जाएं तो सिविल हॉस्पिटल को लाखों की इनकम हो सकती है और उससे हॉस्पिटल का बिजली पानी और सफाई का खर्चा चल सकता है।
हैरानी की बात तो यह है कि पालमपुर के सिविल हॉस्पिटल के सामने ही वेटरनरी हॉस्पिटल बनाया जा रहा है जबकि पालमपुर में यूनिवर्सिटी का वेटरनरी हॉस्पिटल लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है और जिस प्राइम लोकेशन पर यह वेटरनरी हॉस्पिटल बनाया जा रहा है वहां पर ना तो पशु आते हैं और ना ही पशुओं को लाना या ले जाना आसान है, क्योंकि वहां पर भीड़ भाड़ और ट्रैफिक इतनी अधिक है कि किसी पशु को वहां ले जाना नामुमकिन सा है । और यहां पर अधिकतम केवल 10 और 15 के बीच में ओपीडी रहती होगी। और वह भी केवल छोटे जानवर यानी कुत्ते वगैरा ही आते होंगे।
अगर ऐसी जगह जहां पर वेटरनरी हॉस्पिटल पर करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है तो हमारी सरकारी नीतियां सचमुच में शाबाशी की अधिकारी हैं।
इसी जगह इस प्राइम लोकेशन पर यदि पार्किंग या कोई कमर्शियल कंपलेक्स बना दिया जाए तो नगर निगम और सरकार को करोड़ों की इनकम हो सकती है । हमारी सरकारों को सरकार के तौर तरीके बदलने होंगे और सरकार को कहां से कितनी इनकम हो सके इस विषय को सूचना होगा और कहां पर कितने खर्चों में कटौती हो सकती यह भी प्राथमिकता में होना चाहिए।
हमें यह सोच बदलनी पड़ेगी कि सरकारी पैसा है हमारे बाप का क्या जाता है खर्च होता है होने दो व्यर्थ जाता है जाने दो हमें तो पूरी तनख्वाह मिल ही जाएगी। यह भी सोच होती है कि सरकार कोई कमाने के लिए नहीं होती,वह गवांने के लिए होती है, हमे यह पुरानी सोच भी बदलनी पड़ेगी।
जहां पर हो सके सरकार को खर्चे बचाने चाहिए, और जहां पर हो सके वहां पर संसाधन जुटाने चाहिए।
सरकार को पैसे इसलिए कमाने चाहिए ताकि सरकार के खजाने में अधिक पैसा आए और लोगों को अधिक सुविधाएं दी जा सके। सरकारी आवासों के निर्माण और रखरखाव पर हम करोड़ों रुपया खर्च करते हैं और कुछ आवास बिल्कुल प्राइम लोकेशन पर होते हैं इसी तरह से कुछ दफ्तरों के लोकेशन बिल्कुल प्राइम लोकेशन होती है जहां पर कमर्शियल एक्टिविटी की जा सकती हैं ।
सरकारी दफ्तर 400 या 600 मीटर आगे पीछे भी हो सकता है वहां तक सड़क मिल जाए पार्किंग मिल जाए तो लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन जहां पर बिजनेस प्वाइंट होता है प्राइम लोकेशन होती वहां पर सरकारी दफ्तर का झंडा गाड़ देना कोई समझदारी की बात नहीं है ।उसी जगह को सरकार बिना कोई पैसा खर्च किये करोड़ों रुपया कमा सकती है और वही पैसा लोगों के सुख सुविधा और उनके विकास पर खर्च किया जा सकता है।
सरकार के सलाहकारों मे कोई बिजनेस माइंडेड इंसान होना चाहिए और सरकार के आय के साधन कैसे बढ़ाए जा सके यह सोचने वाला होना चाहिए जिससे सरकारी कार्यों में बाधा या रुकावट भी ना आए और सरकार को करोड़ों की इनकम बिना एक पैसा खर्च किए भी आ जाए ऐसी सोच वाला इंसान शाशन प्रशासन में होना चाहिए ,न कि वही पुराने ढर्रे पर सिर्फ फाइलें इधर से उधर खिसकाने वाले बाबू।
चित्र में दिखाए गए जगहों पर यदि कोई कमर्शियल बन जाए और सरकार सिर्फ इस जमीन को लीज पर दे दे तो करोड़ों रुपए की इनकम हो सकती है या इसे PPP या BOT मोड पर शुरू करे तो भी करोड़ों की इनकम हो सकती है। बात सिर्फ सरकार के फायदे की सोचने की है। सरकार में शायद किसी गुजराती बनिये सलाहकार का होना जरूरी है।
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि सरकारी आती जाती रहती हैं और वह अपने अपने हिसाब से अपनी पार्टी के हित को देखकर निर्णय करते हैं परंतु अफसरशाही अगर देश प्रदेश के हित में सोचें तो वह ऐसे जन हित के निर्णय सरकारों से करवा सकते हैं तथा अगली सरकार के इस तरह के निर्णय को पलटने में असमर्थ रहेंगी ।
नेता आते जाते रहते हैं परंतु अफसरशाही को हमेशा देश हित में सोचना चाहिए क्योंकि वह तो देश /प्रदेश में ही रहते हैं सरकारों के जाने के बाद भी,और किसी भी वर्तमान सरकार के लिए निवर्तमान सरकार द्वारा देश या प्रदेश हित में लिया गया फैसला बदलना आसान नहीं होता।
Edited by रेणू शर्मा
