गोलोक एक्सप्रेस में आइए दुख दर्द भूल जाइए ABCD की भक्ति में लीन होकर नित्यानंद पाइए
सरल भागवत गीता क्या है?
भागवत गीता एक निर्देशात्मक पुस्तिका है जो हमें सिखाती है 1 मानव जीवन एक सुनहरा अवसर है यह जानने का कि हम कौन हैं? व्याख्या __हम आम तौर पर अपने शरीर को ही अपनी पहचान समझते हैं लेकिन हम वास्तव में एक आत्मा है जो जन्मों-जन्मों तक जीवन और मृत्यु के दुष्चक्र में फंसी रहती है । हम जीवन में अपने कर्मों के अनुसार विभिन्न शरीर को तब तक धारण करते रहेंगे जब तक हम खुद को एक आत्मा के रूप में पहचान नहीं लेते जोकि सुपर सोल यानि परमात्मा का अंश है एक इंसान के रूप में जन्म लेने के कारण हमारे परम पिता भगवान ने हमें अपने वास्तविक स्वभाव को जानने के लिए दिव्य मार्ग पर आगे बढ़ने का अवसर दिया है भगवत गीता द्वारा भगवान के दिए गए निर्देश हमें स्वयं को जानने में मदद करते हैं। 2 श्री भगवान हरि के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में सर्वोत्तम तरीके से अपने कर्तव्यों का पालन कैसे करें और अंत में अपने वास्तविक व स्थाई घर यानी बैकुंठ /गोलोक वापस कैसे जाएं । व्याख्या ___हम में से प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता है लेकिन इसके लिए हमें सबसे अच्छे मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है जोकि हमारे सर्वोच्च पिता भगवान श्री हरि के अलावा और कोई नहीं कर सकता श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से भगवान श्री हरि के नेतृत्व में हम सर्वोत्तम संभव तरीके से अपने सभी कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं इस प्रकार हम गोलोक धाम यानी हमारा स्थाई घर तक पहुंचने के लिए अवसर हो सकते हैं। 3 इस दुनिया में रहने का शांतिपूर्ण खुशहाल सामंजस्य पूर्ण तरीका और इस पूरी दुनिया की सराहना एक परिवार के रूप में करना। व्याख्या _____श्रीमद्भागवत गीता हमें खुद को निष्पक्ष रखकर पूरी दुनिया के साथ सद्भाव से रहना सिखाती है और इस तरह जीवन की सभी परिस्थितियों में हम हर्षित रहते हैं भले ही यह परिस्थितियां आरामदायक हो या कठिन हो ।हमें भगवान की इच्छा के प्रति स्वीकृति होनी चाहिए और उन्होंने हमारे लिए जीवन में जो भी निश्चित किया है । उस पर हमें पूर्ण विश्वास होना चाहिए । हमें खुद को अपने परमपिता भगवान श्री हरि के बड़े परिवार का हिस्सा समझना चाहिए और इसी भाग को दिल में रखते हुए संपूर्ण दुनिया के साथ प्रेम व सद्भाव से रहना चाहिए । हमें ना तो दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करनी चाहिए और ना ही दूसरों के दुख में खुशी महसूस करनी चाहिए।
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