पाठकों के लेख एवं विचार

*हिमाचल_मे_हो_सकते_है_श्रीलंका_जैसे_हालात* लेखक महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार

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06 फरवरी 2023- (#हिमाचल_मे_हो_सकते_है_श्रीलंका_जैसे_हालात)–

यह ब्यान हिमाचल के नये मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुख्खू का है। उनके इस ब्यान ने हिमाचल मे हडकंप मचा दिया है। मै स्वयं अमर उजाला अखबार मे छपे इस ब्यान से चिंतित हूँ। सुख्खू हिमाचल के मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ राजनेता भी है। उनकी हर बात को हिमाचल की जनता द्वारा गंभीरता से लेना स्वभाविक है। उन्होने ब्यान हिमाचल की पूर्व सरकार की आलोचना करते हुए दिया है । जिसमे उन्होने कहा कि पिछली भाजपा सरकार 75000 करोड़ का ऋण और 11000 की देनदारियां छोड़कर गई है। उनका कहना है कि इस स्थिति को सुधारने के लिए जनता का सहयोग जरूरी है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय पर हिमाचल की जनता पर और टैक्स का बोझ डाला जा सकता है।

मेरी समझ के अनुसार मुख्यमंत्री जी को विरोधपक्ष मे रहते हुए भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति से अवगत होना चाहिए था, क्योंकि बहुत सी बातें इकनॉमिक सर्वे के माध्यम से और बजट के समय सदन के पटल पर रखी जाती है। कांग्रेस नेतृत्व को प्रदेश की आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने के बाद ही मतदाताओं से लोकलुभावने वायदे करने चाहिए थे। खैर अब प्रदेश की जनता ने आपको प्रदेश की सरदारी सौंप दी है। आपकी तरफ से जनता पर टैक्स के बढ़ाने के संकेत दिए जा रहे है। आप पहले ही डीजल पर तीन रूपए प्रति लीटर वैट बढ़ा कर जनता को उपहार दे चुके है। आपके ब्यान तो कह रहे है कि हिमाचल आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, लेकिन सरकार अपने खर्चों मे कटौती करने के लिए तैयार नहीं है। आपकी पहली सरकार है जिसमे कैबिनेट रैंक के साथ तीन सलाहकार नियुक्त किए गए है। शिमला और दिल्ली मे ओ.एस.डी नियुक्त किए गए है। चंडीगढ़ मे भी मिडिया सलाहकार लगाया गया है। आपकी सरकार ने 6 सी.पी.एस बना दिए है। विधायकों को भी कैबिनेट रैंक के साथ चैयरमैन लगाने की सरकार की योजना है।

मेरी समझ मे यदि आप प्रदेश की जनता का इस कठिन परिस्थिति मे सहयोग चाहते है तो आपको और आपके साथी विधायकों को फिजूल खर्ची बंद कर एक सकारात्मक सन्देश प्रदेश की जनता को देना होगा। मेरे विचार मे प्रदेश को आर्थिक संकट मे से निकालने के लिए केवल टैक्स लगा देना समाधान नहीं हो सकता है। इसके लिए कठोर आर्थिक अनुशासन और मितव्ययता को सरकार के हर एक स्तर पर लागू करना होगा। मेरी समझ मे आर्थिक अनुशासन और मितव्ययता की शुरुआत मुख्यमंत्री और मंत्रीगण अपने से शुरू करें तो बेहतर होगा। हिमाचल को श्रीलंका बनने से बचाने की पहली जिम्मेदारी राजनेताओं की है। फिर इस बचाव अभियान मे जनता जरूर सहयोग देगी।

Mohinder Nath Sofat Ex.Minister HP Govt.

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।

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