[robo-gallery id=”264″]हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संसद और राज्यों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को किया। पीएम मोदी ने कहा कि हमें देश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है। कोरोना की लड़ाई में सभी राज्यों ने एकजुटता के साथ काम किया जोकि ऐतिहासिक है।
भारत 110 करोड़ वैक्सीन डोज का आंकड़ा पार कर चुका है। यह समय अपनी सफलताओं को आगे बढ़ाने का है और साथ ही नए विजन के साथ नए नियम और नीतियां भी बनानी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे सदन की परंपराएं और व्यवस्थाएं स्वभाव से भारतीय हों। हमारी नीतियां, कानून भारतीयता के भाव को, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाले हों।
सबसे महत्वपूर्ण, सदन में हमारा खुद का भी आचार-व्यवहार भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो। पीएम मोदी ने कहा कि ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है। भारत विविधताओं से भरा है। पीएम ने कहा कि हम विधानसभा सदनों में साल में तीन चार दिन ऐसे रखे जा सकते हैं जिनमें समाज के लिए कुछ विशेष कर रहे जनप्रतिनिधि अपने अनुभव बताएं। सदन में सार्थक चर्चा और परिचर्चा बहुत जरूरी है।
युवा, महिला जनप्रतिनिधियों को सदन में ज्यादा से ज्यादा बोलने का मौका मिलना चाहिए। पीएम मोदी ने वन नेशन, वन लेजिस्लेशन का मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म/पोर्टल बनाया जाए जिसमें केवल संसदीय व्यवस्था की जानकारी मिल सके। सभी राज्य डिजिटल तकनीक पर काम करें।