*(#कांग्रेस_परेशान_है_अपने_विधायकों_की_आत्मा_की_आवाज_से)–लेखक: Mahendra Nath Sofat former minister Himachal Pradesh*

14 जून 2022– (#कांग्रेस_परेशान_है_अपने_विधायकों_की_आत्मा_की_आवाज_से)–


कांग्रेस हरियाणा राज्यसभा चुनाव मे जीती हुई बाजी हार गई। कुलदीप विश्नोई ने आत्मा की आवाज पर वोट कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ डाल दिया। काफी घमासान के बाद भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा को विजयी घोषित कर दिया गया। कुलदीप विश्नोई के अतिरिक्त किसी एक वरिष्ठ कांग्रेसी विधायक का वोट रद्द हो गया था। खैर यह आत्मा के नाम वोट देने का प्रचलन राहुल गांधी की दादी श्रीमती इंदिरा गांधी के समय शुरू हुआ था। जब इन्दिरा जी ने राष्ट्रपति के चुनाव मे कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार संजीवा रेड्डी के खिलाफ वी वी गिरी को खड़ा कर दिया था और सांसदो और विधायकों को अपनी आत्मा की आवाज सुनते हुए वोट वी वी गिरी को देने की आपील की थी।अब वही आत्मा की आवाज गांधी परिवार द्वारा नामित उम्मीदवारों के खिलाफ सुनी जा रही है। 2016 मे भी आत्मा की आवाज पर वोट डालने वाला पैन भी हरियाणा मे ही बदल दिया गया था और कांग्रेसी विधायकों ने अनाधिकृत पैन इस्तेमाल कर भाजपा समर्थित उम्मीदवार की जीत का रास्ता साफ कर दिया था। खैर कुलदीप विश्नोई ने कहा कि मुझे राहुल गांधी से मुलाकात करनी थी जो समय मुझे नहीं दिया गया इसलिए ही मुझे अपनी आत्मा की आवाज सुननी पड़ी।
अजय माकन की हार गांधी परिवार की बड़ी क्षति है। माकन की गिनती गांधी परिवार के बफादारों मे की जाती है। आज गांधी परिवार के किसी सदस्य से मुलाकात को कांग्रेस मे बड़ी बात माना जाता है। राहुल, प्रियंका और उनकी माताश्री का मुलाकात के मामले मे व्यवहार राजीव गांधी, संजय गांधी और यहां तक इंदिरा गांधी से भी हटकर है। वह लोग मुलाकातियों को अधिक इतंजार नहीं करवाते थे। वह कांग्रेसियों को दिल्ली आने और फीडबैक देने के लिए प्रेरित करते थे। कांग्रेस के लोग राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहते है लेकिन एक तो उनकी देश मे उपलब्धता बहुत कम है और दुसरा उनका ऑफिस जल्दी-जल्दी समय नहीं देता। कुलदीप विश्नोई की तर्ज पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी सार्वजनिक तौर पर अपनी शिकायत की है कि वह पिछ्ले चार वर्ष से राहुल से मुलाकात का समय मांग रहे है और समय मिलने की इतंजार कर रहे है। प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक मे छपे लेख के अनुसार कांग्रेस मे राहुल से मुलाकात को परिमियम माना जाता है और नेताओं को समय देने को गांधी परिवार फेवर देना मानता है। यदि गांधी परिवार का अपने विधायकों, सांसदों, नेताओं और कांग्रेसजनो के साथ यही रवैया रहा तो अधिक से अधिक कांग्रेस के लोग अपनी आत्मा की आवाज सुनने के लिए मजबूर होंगे।
#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।