*30_वर्ष_पुरानी_स्मृतियां_ताजा_हो_गई* लेखक महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश

22 जून 2022– (#30_वर्ष_पुरानी_स्मृतियां_ताजा_हो_गई)–
सोमवार को एक बार फिर परवाणु रोपवे तकनिकी खराबी के चलते बीच मे ही फंस गई और हवा में फंसे रहे 11 पर्यटक। मेरे स्मृति पटल पर 1992 के इसी रोपवे का हादसा और उसकी यादें ताजा हो गई। मै शिमला मे था और मुझे तुरंत तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार जी की ओर से टी टी आर होटल पहुंचने के निर्देश प्राप्त हुए। असल मे सोमवार की तरह ही 10 पर्यटक रोपवे मे खराबी के कारण फंस गए थे। मेरे परवाणु पहुंचने से पहले जिला प्रशासन तत्कालीन जिलाधीश श्रीमती उपमा चौधरी के नेतृत्व मे घटनास्थल पर पहुंच चुका था। वह हादसा सोमवार के हादसे से कहीं अधिक गंभीर था। सोमवार को ट्राॅली शुरुआती दौर मे ही फंस गई थी और इसकी जमीन से ऊंचाई केवल 150 फीट बताई जा रही है। 30 वर्ष पूर्व हुई घटना मे यह ट्राॅली रोप के बिल्कुल मध्य मे फंसी थी और नीचे केवल कौशल्या नदी थी।उसकी नदी से भी ऊंचाई कम से कम 2500 फीट थी। शुरुआती बातचीत मे रेस्क्यू असम्भव नजर आ रहा था। स्थानीय स्तर पर या स्थानीय ऐंजसिंयो के बस की बात बिल्कुल नहीं थी। अधिकारीयो के साथ बातचीत करने के बाद फौज और एयर फोर्स की मदद से ही बचाव कार्य करने का निर्णय लिया गया। एयरफोर्स का हेलिकॉप्टर सरसवा उत्तरप्रदेश और कमांडो नाहन यूनिट से आए यह हमारे सेना के अधिकरियों की हिम्मत और सूझबूझ ही थी कि सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
मेरे विचार मे मानवीय जीवन की सुरक्षा के इस प्रकार की तकनीकी खराबी स्वीकार्य नहीं हो सकती है। यह बात सही है की मशीन मे तकनीकी खराबी मशीन का हिस्सा है लेकिन मानवीय जीवन की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी होटल प्रबंधन की होनी चाहिए। 1992 रैस्कयू ऑप्रेशन का खर्च लगभग 50 लाख रूपये था। इस तर्क के साथ यह लाभ कमाने वाली ईकाई है और इस रकम की अदायगी होटल प्रबंधन को करनी चाहिए मेरे कहने पर जिला प्रशासन ने होटल प्रबंधन से लिखित आशवासन ले लिया था, लेकिन सरकार बदल गई और कांग्रेस सरकार ने वह पैसा माफ कर दिया था। उस समय इस दुर्घटना की जांच वी वी टंडन जो सरकार के वरिष्ठ अधिकारी थे और बाद मे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त भी बने थे उन्हे सौंपी गई थी। जहां तक मुझे स्मरण है उन्होने इस रोपवे मे सुधार करने और हिमाचल रोपवे एक्ट मे भी संशोधन करने की सिफारिश की थी। सोमवार की घटना मे अच्छी बात है कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है और घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री जी स्वयं मौके पर पहुंचे। इस सारे मामले की जांच अतिआवश्यक है क्योंकि होटल प्रबंधन के लिए यह रोपवे नोट छापने की मशीन बन कर रह गया है। सरकार को इस तरह के हादसो को लेकर उनकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।

लेखक महेंद्र नाथ सोफत