Editorial ;*क्या_नीतीश_एक_बार_फिर_मारेंगे_पलटी* *महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार*



27 जनवरी 2024- (#क्या_नीतीश_एक_बार_फिर_मारेंगे_पलटी ?)–

बिहार की राजनीति मे अफवाहों और अटकलों का बाजार गर्म है। इन अफवाहों मे कितनी सच्चाई है मै बताने मे सक्ष्म नहीं हूँ, फिर भी कथन है कि धुआं है तो कहीं आग नही चिंगारी तो जरूर होगी। अभी तक यह तो अटकलें या अफवाहे सोशल नेटवर्किंग तक सीमित थी, लेकिन कल के टाइम्स ऑफ इंडिया जो कि देश का प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक है ने अपने प्रथम पृष्ठ पर इस आशय की खबर छाप कर अटकलों और अफवाहों को गभींर बना दिया है। नीतीश और उनके डिप्टी तेजस्वी मे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। नीतीश का परिवारवाद पर किए तंज से लालू की बेटी रोहिणी भड़क गई और उन्होने नीतीश पर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ कर सोशल नेटवर्क पर पोस्ट कर दी। उधर भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री से नीतीश के एन.डी.ए मे शामिल होने के बारे मे पूछा तो उन्होने कहा राजनीति मे किसी के लिए दरवाजे बंद नहीं होते है। यदि बंद हो भी जांए तो खुलते भी है।
स्मरण रहे अभी भाजपा का स्टैंड था कि अब नीतीश के लिए एन.डी.ए के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके है। इन ब्यानों और खबरों के अवलोकन के बाद मेरी समझ मे बिहार की राजनीति मे कुछ जरूर पक रहा है। नीतीश कुमार जिन्हे उनके डिप्टी तेजस्वी पलटू राम चाचा की संज्ञा दे चुके है का इतिहास ऐसा ही है कि वह कभी भी अपनी निष्ठाएं बदल सकते है। वह अपनी अस्थिरता और स्वार्थ की राजनीति के लिए जाने जाते है और उनका एक ही लक्ष्य है सत्ता मे बने रहना। स्मरण रहे 2013 मे इसलिए एन.डी.ए से बाहर हो गए थे क्योंकि भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया था। उसके बाद वह दो बार लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी के साथ सरकार चला चुके हैं और दो बार भाजपा के साथ। मेरे विचार मे नीतीश न तो तेजस्वी के साथ सहज है और न ही इंडिया गठबंधन मे सन्तुष्ट है। उनका एन. डी. ए मे लौट आना मजबूरी हो सकती है, लेकिन भाजपा उन्हे लेने के लिए क्यों मजबूर है इसकी विवेचना जरूरी है। वह अपनी छवि खराब करने का जोखिम उठा रही है। कभी हरियाणा की आया राम गया राम की राजनीति आज बिहार मे शिखर पर है।
भाजपा का बार-बार नीतीश पर भरोसा करना और फिर धोखा खाना कहां तक उचित है। नीतीश इंडिया गठबंधन और विपक्ष एकता के सबसे बडे वकील थे लेकिन अब वह भाजपा के साथ संवाद कर रहे है। खैर अब राजनीति मे लोकलाज खत्म हो चुकी है। इस सन्दर्भ मे भाजपा के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय जगन्नराव जोशी का कथन याद आता है। उन्होने भरी सभा मे कहा था कि लोकलाज के मामले मे नेता वेश्याओं से भी बदतर है। वेश्य ग्राहक को अन्दर लेती है और किवाड बंद करती है लेकिन नेता एक के साथ कमरे मे बात करते है और दुसरे को खिड़की से इशारा करते हैं। देखो और इंतजार करो कि बिहार की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठता है।
#आज_इतना_ही।
स्वर्गीय जगन नाथ जोशी जी का कथन अक्षरक्षा सही है वहां सब पैसे के लिए होता है और यहां येन केन प्रकेन कुर्सी के लिए , सवाल उठता है कि क्या राजनीति का स्तर इस कदर गिर चुका है कि अपने आपको सैद्धांतिक पार्टी बताने बाली भाजपा केवल अपना कुनबा बढ़ाने के लिए अपने सिद्धांतों और अपनी बातों से मुकर रही है, नीतीश का भाजपा में आकर भाजपा के गुण गाना और भाजपा छोड़ कर भाजपा के प्रति जहर उगला भला कोन भुला सकता है और फिर भी नीतीश के लिए दरवाजे खुले हैं तो बीच की अपनी कमी का आंकलन केवल भाजपा ही कर सकती है every thing is fair in love and politics