Editorial:- *पश्चिम_बंगाल_के_राज्यपाल_के_खिलाफ_आरोप_की_विवेचना_अति_आवश्यक*


05 मई 2024–(#पश्चिम_बंगाल_के_राज्यपाल_के_खिलाफ_आरोप_की_विवेचना_अति_आवश्यक)–

देश का संघीय ढांचा लगातार कमजोर होता जा रहा है। खैर गैर भाजपा राज्यों मे राज्यपालों द्वारा बढ़ते हस्तक्षेप के चलते पहले जो लड़ाई कोर्ट मे लड़ी जा रही थी और अब सड़क पर पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल का ताजा घटनाक्रम बहुत गंभीर है। स्मरण रहे पश्चिम बंगाल के राजभवन की महिला कर्मी ने वहां के राज्यपाल सी वी आनंद बोस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। राज्यपाल का पद एक सवैधांनिक पद है और आज तक यह बहुत परिपक्व व्यक्तियों के लिए रिजर्व रहता था। वह केन्द्रीय सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यों मे तैनात किए जाते है और केन्द्र के आंख-कान माने जाते है। पिछले दस वर्षों मे राज्यपालों और गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों के बीच के संबंधो मे तकरार की खबरों मे लगातार बढ़ौतरी हो रही है। कई गैर भाजपा मुख्यमंत्री आरोप लगाते है कि राज्यपाल केन्द्रीय सरकार के इशारे पर अपने पद की लक्ष्मण रेखा पार कर हमारे काम मे दखल देते है। वह इस स्थिति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इसके चलते कई मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट तक गए और कोर्ट ने कुछ राज्यपालों को अपनी सीमा मे रहने की हिदायत भी दी है।
आज कल पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आपसी विवाद सर्वविदित है। राज्यपाल लगातार पश्चिम बंगाल के करप्शन और हिंसा के मामले उठा रहे है। मुख्यमंत्री उनकी टिप्पणियों को अपनी सरकार के खिलाफ मान रही है और अपनी सरकार के काम- काज मे हस्तक्षेप समझ रही है। इसी बीच महिला कर्मी का राज्यपाल के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को आडे हाथों लिया है। उधर राज्यपाल ने आरोप को राजनीति से प्रेरित बताया है। मेरी समझ मे मुख्यमंत्री को बयान देने के स्थान पर इसकी तुरंत जांच के आदेश देकर सच्चाई का पत्ता लगाना चाहिए था। वह इस पर राजनीति कर रही है और वह इस मुद्दे पर राज्यपाल के साथ प्रधानमंत्री को भी घेर रही है। महिला कर्मी के आरोप की सच्चाई के लिए विवेचना जरूरी है, लेकिन जांच से पहले ही मीडिया ट्रायल गलत है। आरोप सच्चे हो या झूठे यह सारा घटनाक्रम अति दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
