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29 अप्रैल 2023- (#क्या_भाजपा_राजनिति_मे_वंशवाद_या_परिवारवाद_के_खिलाफ_है ?)-
भारत के राजनैतिक मानचित्र पर वंशवाद या परिवारवाद का प्रभुत्व है। अधिकांश क्षेत्रीय पार्टियां पारिवारिक पार्टियां है। उदाहरण के लिए समाजवादी पार्टी मुलायम सिंह परिवार की निजी पार्टी है। शिरोमणी अकाली दल बादल परिवार की पार्टी है। आरजेडी के खाना मालिक मे लालू परिवार का नाम दर्ज है। डी एम के की विरासत करुणानिधि के बाद उनके बच्चो को चली गई है। टी एम सी मे ममता के बाद यदि कोई शक्तिशाली है तो कोई और नही उनका भतीजा ही कर्ताधर्ता है। देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष भले मल्लिकार्जुन खरगे हो लेकिन यह पार्टी असल मां, बेटा और बेटी की मानी जाती है। इसके अतिरिक्त शिवसेना और हरियाणा की इंडियन लोकदल पार्टियां भी परिवारवाद से ग्रस्त है। भाजपा राजनिति मे इन सभी दलों की परिवारवाद की पृष्ठभूमि को भुनाना चाहती है, इसीलिए वह परिवारवाद का विरोध करती है।
स्मरण करे इसी के चलते हिमाचल के उपचुनावों मे स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा को टिकट नहीं दिया गया था। ऐसा ही उदाहरण गोवा मे पूर्व रक्षामंत्री स्वर्गीय परिकर के बेटे को लेकर मिलता है। मै राजनिति मे परिवारवाद को निरूत्साहित करने के प्रयास का अनुमोदन करता हूँ, लेकिन इस मामले मे सुविधा की राजनिति के चलते अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड को सही नहीं मानता हूँ।भाजपा ने जहां गोवा मे परिवारवाद का विरोध करते हुए पूर्व रक्षा मंत्री स्वर्गीय परिकर के बेटे का टिकट काट दिया वहीं वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे को उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए टिकट दे दिया गया। इसी प्रकार जिस चेतन का टिकट उपचुनाव मे परिवारवाद के नाम पर काटा गया उन्हे विधानसभा के आम चुनाव मे प्रत्याशी बना दिया गया था। सवाल है कि क्या पार्टी का यह सिद्धांत समय और सुविधा अनुसार इस्तेमाल किया जाता है। कर्नाटक के विषय मे छपी रिपोर्ट का अध्ययन करने पर इस सवाल का जवाब हां है। कर्नाटक चुनाव मे निश्चित तौर पर वंशवाद का दबदबा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई दिवंगत मुख्यमंत्री एस आर बोम्माई के पुत्र है। अपदस्थ मुख्यमंत्री बी एस येद्दियुरप्पा ने भाजपा हाईकमान को अपने छोटे बेटे बी वाई विजयेंद्र को शिकारीपुरा से टिकट देने के लिए मजबूर कर दिया है । याद रहे उनके बड़े भाई पहले से ही लोकसभा के सदस्य है। युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्य के चाचा को टिकट दिया गया है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार खनन व्यवसायी जनार्दन रेड्डी के भाइयो सोमशेखर रेड्डी और करूणाकर रेड्डी को क्रमशः बेल्लारी और हरपनहली से टिकट दिए गए है। इसी प्रकार रमेश जारकीहोली और बालचंद्र जारकीहोली भाइयो को टिकट दिया गया है। रिपोर्ट बताती है कि स्वर्गीय उमेश कट्टी के बेटे निखिल कट्टी और उनके चाचा रमेश कट्टी ने भी टिकट पाने मे सफलता पाई है। भाजपा सांसद कराडी संगन्ना की बहू मंजुला अमरेश ने पार्टी छोड़ने की धमकी दे कर टिकट का जुगाड़ कर लिया है। भाजपा विधायक अरविंद लिंबावली की पत्नी मंजुला को भी टिकट दिया गया है। कर्नाटक की भाजपा मंत्री शशीकला जोले ने अपने पति अन्ना साहब जोले के लिए टिकट पाने मे सफलता पाई है। चिंचोली प्रत्याशी अविनाश जाधव गुलबर्गा सासंद उमेशा जाधव के बेटे है। इसी प्रकार उम्मीदवार चंद्रकांत पाटिल एम एल सी रहे बी जी पाटिल के बेटे है। परिवहन मंत्री बी श्रीरामुलु को बाल्लारी और उनके भतीजे टी एच सुरेश बाबू को कामप्ली से उम्मीदवार बनाया गया है।पर्यटन मंत्री आनंद सिंह की जगह उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह को टिकट दिया गया है।प्रतिष्ठित दैनिक मे छपी इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद भाजपा का परिवारवाद के विरोध को समझना बहुत सरल है। भाजपा का इस मामले मे रूख लचीला और सिद्धांत सुविधा के अनुसार बदलता रहता है।

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।