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*आजकल पालमपुर सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर और मरीज लैब टेस्ट के लिए हो रहे परेशान।*

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आजकल पालमपुर सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर और मरीज लैब टेस्ट के लिए हो रहे परेशान।

पालमपुर के सिविल हॉस्पिटल में आजकल मरीजों को टेस्टों के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और साधारण से टकराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है । सिविल हॉस्पिटल में जो टेस्ट डॉक्टर द्वारा लिखे जाते हैं वह लैब में करवाने होते हैं ,जो टेस्ट सरकारी लैब में नहीं होते उन्हें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सिविल हॉस्पिटल की लैब में टेस्ट करवाने पड़ते हैं ।
इन टेस्टों में अधिकतर टेस्ट निशुल्क होते हैं जब डॉक्टर मरीज को कोई टेस्ट लिखता है तो वह लैब में जाता है ,वहां काफी लंबी लाइन लगी होती है ।लम्बे इंतजार के बाद जब मरीज डॉ द्वारा द्वारा लिखे गये टेस्ट करवाने के लिए लैब पर्ची देता है तो वहां पर उनके टेस्ट /पर्ची को देख कर कह दिया जाता है कि आप पर्ची की फोटो कॉपी लेकर आइए ।वह मरीज लाइन से हटकर फोटोकॉपी करवाने जाता है। और वापिस फिर से लाइन में लग जाता है इसी चक्कर में उसे घंटे 2 घंटे का समय नष्ट हो जाता है ।नम्बर आने पर उसके बाद उस मरीज को एक फार्म भर कर दिया जाता है और कहा जाता है कि इसे डॉ से वेरीफाई करवा कर लाएं।मरीज फिर से डॉक्टर के पास जाता है वहां पर लाइन में लगता है लंबे इंतजार के उसका नम्बर आता है और वह डॉ से साईन करवाता है कई बार इस फॉर्मेलिटी में उसका पूरा दिन समाप्त हो जाता है ।क्योंकि कुछ टेस्ट ऐसे होते हैं जो निश्चित अवधि में ही और निश्चित समय में किए जाते हैं ।यदि टेस्ट डॉक्टर ने लिखे हैं तो फिर उसी डॉक्टर से फिर से वेरीफाई क्यों करवाने पड़तें हैं यह काम एक ही बार में क्यों नहीं किया जा सकता? फोटो कॉपी की मशीन या स्केनर लैब में ही क्यों नहीं रखी जा सकती ?ताकि मरीज वहीं पर फोटोकॉपी करवा ले .जो मरीज बाहर से आते हैं उन्हें बहुत समय तो फोटोकॉपी के लिए लगाना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त जिन मरीजों को इमरजेंसी में जरूरी टेस्ट करवाने पड़ते हैं उन्हें भी इन्ही फॉर्मेलिटीज से गुजरना पड़ता है और जब तक वह टेस्ट होते हैं तो कई बार डॉक्टर ओपीडी से चले गए होते हैं ।
बताइए इमरजेंसी में किसी मरीज का टेस्ट यदि 15 या 20 मिनट में होना था उसे पूरा दिन लग जाए तो उस मरीज और उसके तीमारदारों पर क्या बीतेगी?
हॉस्पिटल प्रशासन तथा प्रदेश सरकार को चाहिए कि मरीजों को हो रही इस दिक्कत से निजात दिलवाई जाए। इस तरह की फॉर्मेलिटी से डॉक्टर भी परेशान हो रहे हैं और मरीज भी बहुत मुश्किल में पड़ रहे हैं ।इसमें ना तो मरीजों का भला है और डॉक्टर भी परेशान हो रहे हैं वह अलग।
हॉस्पिटल प्रशासन को चाहिए कि इस विषय पर जरूरी कदम उठाए ताकि मरीजों को परेशानी से छुटकारा मिल सके।

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