*नागालैंड_से_निकला_नया_राजनैतिक_सन्देश*


12 मार्च 2023- (#नागालैंड_से_निकला_नया_राजनैतिक_सन्देश)–

अभी हाल ही मे नागालैंड मे विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हुए है। वहां भाजपा ने एक प्रादेशिक पार्टी से मिलकर चुनाव लड़ा और इस गठबंधन ने 60 मे से 37 सीटें जीत कर बहुमत हासिल कर लिया। अब नागालैंड मे नैफ्यू रियो के नेतृत्व मे नेशनलिस्टिक डेमोक्रेटिक प्रोग्रैसिव पार्टी की सरकार बनी है। स्मरण रहे भाजपा इस सरकार की मुख्य सहयोगी पार्टी है। प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक मे छपे एक लेख के अनुसार नागालैंड के राजनैतिक घटनाक्रम की विलक्षण घटना यह है कि जिन पार्टियों ने चुनाव मे एक- दूसरे का डटकर विरोध किया, उन्होने मिलजुल कर सरकार बनाई है। सबसे दिलचस्प बात है कि 60 सदस्यीय विधान सभा मे कोई भी विरोध पक्ष नहीं है। यानि की सभी विधायक एक मत और एक स्वर से नैफ्यू रियो की सरकार का समर्थन कर रहे है। आश्चर्य जनक बात है महाराष्ट्र मे भाजपा के धुर विरोधी शरद पवार की नैशनल कांग्रेस पार्टी को वहां 7 सीटें मिली है। वह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप मे उभर कर आई है। हालांकि पवार को भाजपा के साथ हाथ मिलाने मे दुविधा थी लेकिन सातों विधायक अलग-थलग न रह कर सत्तारूढ़ गठबंधन मे शामिल होना चाहते थे। पवार को उनके दबाव के आगे झुकना पड़ा और गठबंधन का समर्थन करना पड़ा।
स्मरण रहे यहां आठ पार्टियों ने विरोधी बन चुनाव लड़ा था लेकिन इन सब के जीते हुए विधायक अब सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य है। अभी यह निश्चित नहीं है कि इन विरोधी पार्टियों के विधायकों मे से कुछ विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा या नहीं। मेरे विचार मे नागालैंड की राजनैतिक पार्टियों के पास एक नया राजनीतिक प्रयोग करने के लिए यह एक अवसर है। वह राष्ट्रीय सरकार की तर्ज पर सर्वदलीय सरकार बनाने का प्रयोग कर सकते है। जिस सरकार मे सब फैसले गठबंधन बहुमत से कर सकता है। यह सरकार निश्चित तौर पर पक्ष और विपक्ष के फिजूल के दंगल से मुक्त होगी। इसकी सफलता के लिए एक शर्त जरूरी है कि गठबंधन मे आतंरिक लोकतंत्र हो और सभी निर्णय बहुमत से हो और सभी नेता परिपक्वता से व्यवहार करें।

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।