*नहीं_चल_पा_रही_है_संसद* महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार*


22 मार्च 2023- (#नहीं_चल_पा_रही_है_संसद)–

संसद के दोनों सदनों मे बजट का दूसरा चरण लगातार पक्ष-विपक्ष की जिद की भेंट चढ़ रहा है। मै लगभग आधी शताब्दी से संसद की कार्रवाई पर नजर रख रहा हूँ। अभी तक संसद की कार्रवाई को रोकने, हो हल्ला करने और संसद की कार्रवाई न चलने देने के लिए विपक्ष ही जिम्मेदार होता था, लेकिन इस बार सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों बराबर के जिम्मेदार है। छठे दिन की रिपोर्ट जो मीडिया मे छपी है उसके अनुसार लोकसभा की कार्रवाई शुरू होते ही सत्ता पक्ष के सदस्य राहुल के लंदन ब्यान पर माफी की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे और इसके जवाब मे विपक्षी सदस्य अदाणी मामले मे जेपीसी के गठन की मांग करते हुए वेल मे प्रवेश कर गए। हालांकि लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने इस संशय को खत्म करते हुए कि क्या राहुल को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा या नहीं नियम 357 के तहत सदन मे अपना पक्ष रखने संबंधी राहुल के दिए नोटिस को स्वीकार कर लिया है। मेरी समझ मे यह स्वीकृति लोकतंत्र और उच्च संसदीय परम्पराओं के अनुरूप दी गई है।
राहुल को अपना पक्ष रखने का अधिकार है वहीं देश भी लंदन मे दिए गए उनके ब्यान पर उनका पक्ष जानना चाहता है,लेकिन उनका पक्ष सदन की कार्रवाई चलने के बाद ही सुनने को मिल सकता है जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष चलने नहीं दे रहे है। मै अपनी स्मरण शाक्ति का पूर्ण उपयोग करके भी याद नहीं कर पा रहा हूँ कि कभी सत्ता पक्ष ने संसद की कार्रवाई अवरूद्ध की हो। मेरे विचार मे करदाताओं के पैसे से चलने वाले सदन को पक्ष और विपक्ष को इस तरह अपनी जिद के चलते नहीं रोकना चाहिए। अब जब स्पीकर ने राहुल को अपना पक्ष रखने की अनुमती दे दी है तो उनका पक्ष सुना जाना चाहिए। पक्ष सुनने के बाद अगर सत्ता पक्ष सन्तुष्ट नहीं होता तो उनके पास माफी मंगवाने का विकल्प उपलब्ध है। मान लो राहुल माफी नहीं मांगें तो सत्ता पक्ष राहुल के खिलाफ सदन मे निंदा प्रस्ताव ला सकता है और मामले को खत्म कर सकता है। हालांकि मै उनके ब्यान के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूँ। निंदा प्रस्ताव या माफी की मांग सांसदो के विवेक पर निर्भर करेगी ।

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।