Editorial

*Editorial:असद_के_एनकाउंटर_के_बाद_उसके_पिता_और_चाचा_की_हत्या :-MN SOFAT ,पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार*

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17 अप्रैल 2023- (#असद_के_एनकाउंटर_के_बाद_उसके_पिता_और_चाचा_की_हत्या)-

Mohinder Nath Sofat Ex.Minister HP Govt.

अभी असद के एनकाउंटर की खबर की स्याही सूखी नहीं थी कि प्रयागराज से बड़ी खबर आई कि गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की आज प्रयागराज मेडीकल कालेज के बाहर गोली मारकर कर हत्या कर दी गई है। स्मरण रहे हत्या के समय अतीक और अशरफ पुलिस की सुरक्षा के घेरे मे थे और पुलिस मेडीकल के बाद वाहन की ओर ले जा रही थी और इस दौरान अतीक पत्रकारो से बातचीत कर रहा था तो 3 हमलावरो ने अचानक दोनो भाइयो पर गोलियां बरसा कर हत्या कर दी। सोशल नेटवर्किंग से प्राप्त जानकारी के बाद हत्यारो ने भागने का प्रयास नहीं किया और आत्मसमर्पण कर दिया। तीनो हत्यारो की पृष्ठभूमि अति गरीब परिवार की बताई जा रही है। मीडिया के अनुसार हत्याकांड मे प्रयोग हथियार अति कीमती है। इस हत्याकांड के बाद राजनीति गर्म है। हालांकि खौफ का दूसरा नाम अतीक अहमद था। उसके खिलाफ 50 से अधिक केस पंजीकृत थे।1997 मे उस पर पहला हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। वह पांच बार विधायक और एक बार लोकसभा का सांसद रह चुका था। समाजवादी पार्टी इस हत्याकांड मे उत्तर प्रदेश सरकार की साजिश देख रही है। यह बात सही है कि पुलिस कस्टडी मे अतीक और उसके भाई की हत्या और हत्यारो द्वारा यह कहते हुए आत्मसमर्पण कर देना कि इस हत्या करने के पीछे हमारा मकसद सिर्फ मशहूर हो जाना था यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।

जानकारी यह भी आ रही है कि तीनो का अपना- अपना आपराधिक रिकॉर्ड है, तीनो का संबंध अलग- अलग जगह से है। तीनो का अभी तक कोई रिश्ता सामने नहीं आया। उनका हत्या करने का मकसद और उनके पीछे कौन हो सकता है यह विवेचना का विषय है। हमे विवेचना की इतंजार करनी चाहिए। सोशल नेटवर्किंग का अवलोकन करने पर मैने पाया कुछ लोग इस वारदात को हिन्दु मुस्लिम की दृष्टि से देख रहे। यह गलत है अपराधी का न कोई धर्म होता है न कोई जाति होती है। जब दूबे की जीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी तो कुछ लोगो ने उसे ब्राह्मण प्रताड़ना से जोड़ने का असफल प्रयास किया था लेकिन उत्तरप्रदेश के मतदाताओ ने इन सब बातो से ऊपर उठकर पिछले चुनाव मे योगी आदित्यनाथ को समर्थन देकर उनमे विश्वास प्रकट कर दुबारा सत्ता उन्हे सौंप दी थी। अब फिर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अपराध और माफिया मुक्त प्रदेश बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए आगे बढ़ रहे है। उनके इस अभियान को आमजन का समर्थन प्राप्त है। अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यह हत्या आपसी दुश्मनी या गैंग वार का परिणाम हो सकती है लेकिन किसी बड़ी साजिश से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। कुछ भी रहा हो लेकिन इस हत्याकांड के बाद कुछ लोग एक खौफ से निजात पाया हुआ महसूस कर रहे है। माफिया और राजनैतिक संरक्षण प्राप्त गुंडो के भय का एहसास हिमाचल मे रहते हुए नहीं किया जा सकता है। यह बात सही है कि अपराधी को भी अपने को कानून के सामने निर्दोष साबित करने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन देश की लचर और लम्बी न्यायिक प्रक्रिय ने लोगो का न्यायिक व्यवस्था से विश्वास कम कर दिया है। लोग अपराधियो को तुरंत सजा देने के पक्षधर है।

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।

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