*सत्य वो नही जो दिखाया जाता है , सत्य बहुत कड़वा होता है कई बार मंथन से निकालना पड़ता है*



सत्य वो नही जो दिखाया जाता है , सत्य बहुत कड़वा होता है कई बार मंथन से निकालना पड़ता है ।
विकास पर अर्थशास्री बहुत कुछ लिखते है और कहते हैं । लेकिन किसी भी देश का विकास ऐसे नही हो सकता कि आप एक क्षैत्र में विकास कर ले और दूसरे क्षेत्रों को छोड़ दो । मंत्री मंडल इसी लिए ही बनाए जाते हैं कि संपूर्ण विकास की अवधारणा को पुरा किया जा सके । लेकिन विकास के लिए दृष्टिकोण को अवश्यकता होती है , कल्पना शीलता की अवश्यकता होती है । अगर कल्पना ही नही होगी तो क्या खाक विकास होगा । बस यही कमी है और अधिकत्तर मंत्रालय और विभाग केवल हिट एंड ट्रायल करते हैं नतीजा हम वहीं के वहीं रह जाते हैं । पर्यटन के लिए निहायत ही कल्पना की कमी है । जब की देश की सफाई व्यवस्था से लेकर हवाई जहाज तक , पार्कों से लेकर होटल व्यवसाय तक , ट्रांसपोर्ट से लेकर कैम्पर वैन तक ,फिशिंग से लेकर ट्रैकिंग तक सब पर्यटन से जोड़ा जा सकता हैं , लेकिन इसके लिए सब से जरूरी अवश्यकता यह भी है कि निजी हो या सरकारी क्षैत्र मेहनत का पूरा मुआवजा काम करने वालों को मिले । अंतर बहुत बडा हैं , क्या भारत का कोई भी मजदूर या प्रबंधक अपने एक या दो महीने की तनखाह लेकर विदेेश विशेष कर विकसित देशों में घूम के वापिस आ सकता है । जब कि विदेश का कोई भी मजदूर या ट्रेडीज़ या फिर पर्बन्धक यह क्षमता रखता है , यह बहुत बडा अंतर है । उन्होंने सब्जियों से लेकर फलों तक की नस्लों में अभूत पूर्व सुधार किया है । होटल व्यवसायों में कोई भी आज की बनाई हुई चीज़ कल नही परोस सकता । हर क्षैत्र में विकास की कोई सीमा नहीं और निरंतर जनता की बेहतरी के लिए विभाग और मंत्री विकसित देशों में लगे रहते हैं। वहां पार्क भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित है ऐसे पार्क भी हैं जहां अगर आप अपने परिवार के साथ किसी कैम्पर वैन में घूमने निकले है तो उन पार्कों में आपको barbeque मिल जायेंगे आप पका कर खा सकते है , आप को यह सुविधा कैम्पर वैन में भी है । पार्क में आप सुरक्षित कैम्पर वैन में सुरक्षित कैंप कर सकते हैं , आपकों नहाने के लिए वाशरूम पार्कों में मिल जायेंगे और रात गुजारने के बाद कहीं भी दूसरे दिन के कैंप के लिए निकल सकते है । अभी भारत को उस स्थिति में पहुंचाने के लिए कम से कम तीस साल लग सकते हैं क्योंकि पर्यटन व्यवसाय की रीढ़ सुरक्षा की गारंटी भी जरूरी है हम उसमे भी बहुत पीछे हैं । यहां केवल धार्मिक पर्यटन पर जोर दिया जा रहा है वो भी अच्छा है लेकिन पर्यटन के साथ मानवीय दिलचस्पी और संवेदनाएं भी जुड़ी होती हैं उस और भी ध्यान देना चाहीए ।
