पाठकों के लेख एवं विचार
*’दोस्त’ लेखक विनोद वत्स*



दोस्त
दोस्तो में दोस्त बनके रहियेगा।
कोई दुखी ना हो ऐसा कहियेगा।
मजाक उड़ाओ दोस्ती में दोस्तो का।
दिल पे ना लगे चोट ऐसा कहियेगा।
दोस्ती में किसी का रुतबा नही होता।
जो दोस्त होता है वो खुदा नही होता।
सभी हकदार है मान और सम्मान के।
कोई अपमानित हो ऐसा ना कहियेगा।
जहाँ आपके सम्मान पे बात आ जाये
आपका दोस्त आपकी बात खा जाये।
समझ लो दोस्त नही वो दुश्मन है।
इसी में समझदारी उससे दूर रहियेगा।
जो दोस्तो में एक को धुर बनाते है।
मजाक में दिल की बात कह जाते है
मजाक है बुरा नही मानते दोस्तो का।
ऐसा कहने वालों से दूर रहियेगा।
हमेशा दोस्ती हुनर वालो से होती है।
लेकिन वहाँ भी हुनर में होड़ होती है।
हरेक अपने को सितारा कहता है।
ऐसे जुगनुओं से हमेशा दूर रहियेगा।

विनोद वत्स