*नौकरी की तैयारी के साथ पार्ट टाइम जॉब*तृप्ता भाटिया*


*नौकरी की तैयारी के साथ पार्ट टाइम जॉब*तृप्ता भाटिया*

यह नौकरी की तैयारी के साथ पार्ट टाइम जॉब वही बच्चे करते हैं, जिनके या तो पिता नहीं होते हैं या इतने अमीर नहीं होते हैं कि यह घर बैठे खा सकें…उनके पास पसन्दीदा कपड़े नहीं बल्कि जरूरी से कपड़े होते हैं वो एक ही जोड़ी जूते की कई बार मुरम्मत करवा लेते हैं। वो सिनेमा हॉल फ़िल्म देखने नहीं जाते पर घर में दीवारों पर अपने फ़ेवरिट हीरो-हेरोइन की फ़ोटो चिपका रखते हैं।
इनको सहने पड़ते हैं घरवालो से ज्यादा रिश्तेदारों के ताने, यह हर सरकारी फॉर्म को ललचाई नज़रों से देखा करते हैं, एग्जाम के बाद एक उम्मीद लगाए रखते हैं,
पास हो गये तो बन गई जिंदगी….हार जाने के बाद दोबारा जुट जाते हैं ज़िंदगी बनाने में….इनके पास हार का मातम मनाने का वक़्त नहीं होता।
सिर्फ यही उठाते हैं ताउम्र संस्कारों की गठरी क्योंकि इनके पास उसके अलावा कुछ नहीं होता… यह अक्सर नज़रअंदाज़ किये जाते हैं उस समृद्ध …अमीर …बड़े लोगों के द्वारा जिनको लगता है इन्हें वक़्त देना वक़्त की बर्बादी है। इनसे लोग अक्सर दूरियां बनाकर रखते हैं कि हमारे किस काम के। इनमें कुछ निकलकर हल्का फुल्का अच्छा अपने लिए और समाज के लिए कर ही लेते हैं एक दिन बस उसी वक़्त के इंतज़ार में मैं भी हूँ कहीं।