*शाह भाई से अंतिम बातचीत*



शाह भाई से अंतिम बातचीत)
इंसान हर जगह जीत जाता है लेकिन कुछ जगह ऐसी होती है जहाँ ना दुआ काम करती है ना दवा ऐसा ही वाक्या आज मुक्ति ऑडिटोरियम में रीटा शर्मा के 1000 एपिसोड पूरे होने की खुशी में अवार्ड फंक्शन के दौरान हुआ। मैं कुणाल और इरफान जामियावाला बैठे थे तभी उल्टे हाथ की तरफ मेरे सामने वाली लाईन में शाह भाई एक्टर राकेश साहू के साथ आकर बैठे हम दोनो की हाथ मिलाकर मुलाकात की तब तक अवार्ड का फंक्शन चालू हो चुका था और लोगो को अवार्ड दिये जा रहे यह इसी बीच शाह भाई मुझसे बोले विनोद भाई
ज़रा जल्दी नम्बर लगवाओ ना, जाना है वही मिस्टर फवाद खड़े थे मैने उनसे उनके और अपने अवार्ड को जल्दी दिलाने के लिये कहा और वो अंदर जाकर बोल भी आये ये आकर उन्होंने मुझसे कहा हमारे साथ हमारे एक्टर दोस्त कुणाल और इरफ़ान जामियावाला भी बैठे थे तभी शाह भाई के नाम को पुकारा गया वो उठे सभी ने जोर दार तालियो से उनका स्वागत किया और उन्होंने मुस्कुराते हुये मंच पर अपना अवार्ड लिया और वो मंच से नीचे आये मैने बधाई दी इरफान ने कहा शाह भाई अब तो चायोस में चाय पक्की
उन्होंने कहा क्यों नही विंनोद भाई भी अवार्ड लेले फिर इकठ्ठे चलते है और उस बीच किसी का नाम शायद पंकज रैना भाई को अवार्ड के लिये बुलाया गया वो मंच पर कुछ बोल रहे थे तभी मेरी निगाह बगल में शाह भाई पर गई जो बेसुध कुर्सी पर गिरे पड़े मैं लपक कर उनके पास जाकर उनको एकयूप्रेशर देने लगा तब तक भीड़ जमा हो गई एनोउसमेंट हो गई कोई डॉ है तब तक भीड़ ने मिलकर उन्हें नीचे लिटाया मैं तब तक उन्हें एक्यूप्रेशर करता रहा उन्होंने आंख खोली तभी किसी ने खून पतला करने की दवा दी पर वहा किसी ने मना किया और इरफान जामियावाला ने वो दवा नही दी तब तक धर्मेंद्र गुप्ता आ गये और उन्हें आनन फानन में शाह भाई को लोगो से साथ मिलकर कोकिला बेन अस्पताल ले गये
इधर प्रोग्राम में अमीन रीटा परेशान इरम रोये जा रही थी सभी से पूछा गया प्रोग्राम बंद किया जाये पर लोगो ने कहा वो अस्पताल गये है उनका इंतकाल नही हुआ तो सबकी राय से ये फैसला लिया गया कि अवार्ड फक्शन चालू रखा जाये और बिना तालियों के चुपचाप जिसका नाम पुकारा जाये वो अपना अवार्ड ले जाये बदकिस्मती से पहला ही नाम मेरा पुकारा गया विनोद वत्स राईटर एंड लिरिसिस्ट और मैने मंच पर अधूरे मन से वो अवार्ड लिया और नीचे चला आया सिलसिला चलता रहा उस बीच इरफान ने कॉल करके बताया कि डॉ का कहना है सीरियस है और इधर अवार्ड बांटे जा रहे थे उस बीच उपासना सिंह जी अपने पति नीरज भरद्वाज के साथ आई जहाँ मंच पर उनकी फ़िल्म का ट्रेलर चलाया गया और उसके बाद इरफान का फ़ोन आया शाह भाई नही रहे मैने किस तरह अपने आप को संभाल कर इरफान का बैग लेकर सीधा कोकिला बेन अस्पताल पहुंचा जहाँ कानन भाई पंकज भाई जस्सी धर्मेंद्र गुप्ता प्रशांत इरफान अनिल को देखा अंदर शाह भाई की पत्नी रो रही थी मुझसे वो मंज़र देखा नही गया मैं बाहर आया जहाँ गगन गुप्ता चंदकान्त पांडेय मिले मैं और गगन रिक्शा से घर आ गये घर आकर रात भर बेचैनी में मुझे भी नींद नही आई मेरा दिल भी एक अजीब से डर के कारण घबराने लगा कि मैं भी तो अकेला हूँ फिर मन को हिम्मत दी भगवान का नाम लेकर आधी रात के बाद कुछ आराम आया और मैं कब सो गया मुझे पता नही चला। उनके अंतिम संस्कार में मैं नही जा सका क्योंकि मेरे सामने उनका चेहरा घूम रहा था सॉरी शाह भाई आप जिस लोक मे भी गये उस लोक में आनंद से रहो हम आपको याद करते है करते रहेंगे मिस यू एक अच्छे कलाकार एक अच्छे इंसान को अलविदा दोस्त।
विनोद वत्स की कलम से