Himachal election: सुन_चंपा_सुन_तारा_कौन_जीता_कौन_हारा लेखक महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री


06 जून 2024– (#सुन_चंपा_सुन_तारा_कौन_जीता_कौन_हारा)–

हिमाचल मे लोकसभा मे मोदी मैजिक बरकरार नजर आ रहा है और उपचुनाव मे बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए का नारा कारगर सिद्ध हुआ है। भाजपा ने लोकसभा की चारों सीटों पर जीत दर्ज की है। केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में पांचवी बार जीत दर्ज की है। एक प्रतिष्ठित दैनिक के अनुसार यहां पर एक वोट पी.एम और एक सी.एम के नाम पड़े है। इस संसदीय क्षेत्र की चार मे तीन विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव कांग्रेस ने जीत लिए है। शिमला सीट पर कांग्रेस के युवा प्रत्याशी विनोद सुल्तानपुरी को न तो सरकार का लाभ मिला और न ही 6 बार सांसद रहे पिता कृष्ण दत्त सुल्तानपुरी के नाम का। यह बात दर्ज करने काबिल है कि उन्हे सबसे अधिक वोटों का नुकसान उनके अपने जिला सोलन मे हुआ है, जबकि यहां की चार सीटों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के विधायक करते है।
मंडी मे अभिनेत्री कंगना की सेलिब्रिटी छवि और विरोध पक्ष के नेता जय राम ठाकुर का प्रभाव कांग्रेस के उम्मीदवार विक्रमादित्य पर भारी पड़ा। कांगडा मे देश के बड़े नेताओं मे शामिल चार बार राज्यसभा सदस्य और तेजतर्रार नेता आनंद शर्मा जमीन से जुड़े शालीन कार्यकर्ता और भाजपा संगठन के नेता राजीव भारद्वाज के सामने नहीं टिक पाए। कांग्रेस के लिए यह सन्तोष की बात है कि उन्होने 6 विधान सभा उपचुनाव मे से चार उपचुनाव जीत कर अपनी सरकार को मजबूत करने मे सफलता प्राप्त की है।मेरी समझ मे चार उपचुनावों मे जीत का श्रेय कांग्रेस पार्टी या सरकार को कम जाता है बल्कि यह जीत बागी विधायकों के दल-बदल के खिलाफ मतदाताओं मे उत्पन्न आक्रोश के कारण हुई है। हालांकि यह बात सही है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुख्खू लोकसभा से अधिक इन उपचुनावों पर अधिक फोकस कर रहे थे। विधान सभा उपचुनावों का अवलोकन करने के बाद एक दिलचस्प तथ्य ध्यान मे आता है कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र मे जिन तीन क्षेत्रों मे कांग्रेस ने जीत हासिल की है वहां पर भाजपा प्रत्याशी की भारी बढ़त है। इसका निष्कर्ष यह निकलता है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने कांग्रेस से दल-बदल कर आए भाजपा के उम्मीदवारों को पसंद नहीं किया।
स्मरण रहे सुजानपुर से भाजपा टिकट पर राजेन्द्र राणा चुनाव लड़ रहे थे जिन्होने पहला चुनाव बतौर निर्दलीय उम्मीदवार जीता था और 2017 मे भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को पराजित कर ख्याती प्राप्त की थी लेकिन इस बार वह भाजपा टिकट के बावजूद रणजीत सिंह से चुनाव हार गए है। याद रहे रणजीत सिंह कभी धूमल परिवार के विश्वस्त रह चुके है। विश्लेषकों का मानना है धूमल समर्थकों ने मन से धूमल को पराजित करने वाले राणा को बतौर भाजपा उम्मीदवार स्वीकार नहीं किया था। उन्हे भाजपा के पूर्व प्रत्याशी और कांग्रेस उम्मीदवार रणजीत सिंह मे अधिक अपनापन नजर आ रहा था। खैर भाजपा की लोकसभा मे जीत और कांग्रेस की विधानसभा उपचुनावों मे बढ़त के बावजूद दोनो पार्टियों को आत्मनिरीक्षण और आत्मचिंतन की जरूरत है। जिसकी चर्चा आगे करेगें।
#आज_इतना_ही।