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#bksood आज किसी कारणवश भाटिया जी तथा मेरा देहण की ओर जाना हुआ वहां से कुछ ही दूरी पर शनि सेवा सदन के शुभचिंतक आशीर्वादकर्ता तथा दान करता राकेश खेर जी मिल गए ,उन्होंने कहा कि चलिए आपको आधारशिला स्कूल दिखाते हैं। मैं और भाटिया जी आधारशीला स्कूल गए तो वहां का वातावरण देखकर बहुत प्रसन्न और खुश हुए ।यह स्कूल बहुत ही खुले स्थान तथा प्रकृति की गोद में फैला हुआ है। स्कूल के चारों और हरियाली ही हरियाली है एक तरफ धौलाधार की बर्फ से ढकी हुई चोटिया है, तो दूसरी तरफ लहलहाते हुए हरे भरे चाय बागान हैं। एकदम शांत वातावरण तथा खुला माहौल! ऊपर से स्कूल का परिसर इतना खुला तथा फैला हुआ है कि शायद इतने बड़े क्षेत्र में एक अच्छा सा कॉलेज बन सकता है, परंतु यहां पर आधारशीला Senior Secondary स्कूल है। बच्चों के लिए खुला, स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण प्रदान किया गया है। यहां पर आने वाले बच्चे खुद को शांति निकेतन का विद्यार्थी ही समझते होंगे ।
स्कूल के डायरेक्टर राकेश खेर जी ने स्कूल को कमाई का जरिया ना बनाकर एक सेवा का साधन बनाया है ।यहां पर दिल खोलकर खर्चा करके हर चीज की व्यवस्था की गई है। कोरोना काल में हर कमरे के बाहर ऑटोमेटिक सैनिटाइजर लगाये गये हैं।हर बस में टेंपरेचर गन का इस्तेमाल किया जा रहा है ,ताकि बच्चे का बस में चढ़ने से पहले ही उसका तापमान जांच कर लिया जाए।। स्कूल में एक बेंच पर केवल एक ही बच्चे को बैठाया जा रहा है। मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है ।तथा बच्चों की सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जा रहा है ।स्कूल की प्रिंसिपल संजय बजाज खेर ने बताया कि स्कूल में कोविड प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जा रहा है तथा स्टाफ और स्टूडेंट के लिए जो भी एहतियात बरतनी चाहिए वह सब पूरी तरह से बरती जा रही है ,ताकि इस संकटकाल में किसी को भी परेशानी ना हो ।
स्कूल में वेल इक्विप्ड लैब्स है तथा कंप्यूटर्स की क्लास के लिए लगभग 20 -25 कंप्यूटर लगे हुए हैं बच्चों के लिए लाइब्रेरी तथा छोटे बच्चों के लिए प्ले वे रूम्स का भी बनाये गए है।
स्टाफ की सुविधा के लिए हर चीज का ध्यान रखा गया है! काफी बड़ा प्लेग्राउंड बनाया गया है जिसे शीघ्र ही बढ़ाया जा रहा है।
।यहां पर इन हाउस बच्चों के लिए हॉस्टल भी बनाया जा रहा था परंतु कोरोना के कारण वह प्रोजेक्ट अभी थोड़े दिनों के लिए निलंबित किया गया है जैसे ही हालात ठीक होंगे यहां पर हॉस्टल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
कुछ जरूरतमंद तथा मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के साथ साथ ही फीस भी माफ की जाती है ।
यही कारण रहा कि इतनी सुविधाएं तथा अच्छा मैनेजमेंट होने की वजह से CBSE ने जमा दो( +2, ) की कक्षाओं के लिए यहां पर एग्जामिनेशन सेंटर बनाया था जबकि आसपास के बहुत से अन्य स्कूल भी इस रेस में शामिल थे। यह इस स्कूल की क्रेडिबिलिटी ही थी जिसकी वजह से CBSE ने इसे अपना सेंटर बनाया।
उल्लेखनीय है कि जहां कई स्कूलों ने कोरोना काल में अपने स्टाफ की सैलरी नहीं दी वहीं पर आधारशीला स्कूल ने पूरे कोरोना काल में अपने स्टाफ को पूरी सैलरी दी ,तथा सरकार के निर्देशानुसार स्वेच्छा से बच्चों की ट्यूशन फीस माफ की ।
रोटेरियन राकेश खेर जो स्कूल के डायरेक्टर का कहना है कि यह महामारी तो आ कर चली जाएगी लेकिन वह इस महामारी के जाने के साथ अपने जीवन में कुछ ऐसी दुखद यादें नहीं जोड़ना चाहते जिससे कि उन्हें जीवन भर पछतावा होता रहे कि मैंने किसी के साथ भी नाइंसाफी की थी। किसी के घर की आमदनी को कम किया था और किसी के घर में चूल्हा जलने से रोका था। उन्होंने हर संभव प्रयास किया है कि कोरोना काल में सभी को सैलरी दी जाए ताकि इस संकट काल में वह अपने इन कर्मचारी भाइयों के परिवारों को जो उनके ही परिवार हैं कोई कष्ट ना हो उन्हें कोई दुख ना हो।
स्कूल के स्टाफ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह इस स्कूल में आकर खुद को धन्य समझते हैं क्योंकि इस स्कूल में उन्हें किसी प्राइवेट कंपनी या प्राइवेट स्कूल का एहसास नहीं होता उन्हें यहां पर बिल्कुल सरकारी नौकरी जैसा एहसास होता है। तथा वह यहां पर खुद को सरकारी नौकरी जैसा ही सुरक्षित समझते हैं।