*मदरसों_की_फंडिंग_बंद_करें_सरकार*


14 अक्तूबर 2024- (#मदरसों_की_फंडिंग_बंद_करें_सरकार)–

मदरसों को दी जाने वाली फंडिंग बंद होनी चाहिए यह सिफारिश बाल अधिकार आयोग द्वारा की गई है। प्रतिष्ठित दैनिक मे छपी रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के अधिकारों और भविष्य की चिंता करने वाली शीर्ष बाल अधिकार संस्था जो कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग है ने अपनी ताजा रिपोर्ट मे मदरसों के कामकाज की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि जब तक वे शिक्षा का अधिकार कानून का अनुपालन नहीं करते, उन्हे राज्य की ओर से दी जाने वाली धनराशी पर रोक लगा देनी चाहिए। आयोग का कहना है कि आर.टी.ई अधिनियम 2009 के दायरे से बाहर संचालित धार्मिक संस्थानो का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। शिक्षा का अधिकार कानून से मदरसो को छूट दिए जाने से इन संस्थानो मे पढ़ने वाले बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते है। मेरी समझ मे शिक्षा का अधिकार कानून से मदरसों को छूट कांग्रेस सरकार द्वारा मुस्लिम धर्म के ठेकेदारो के दबाव मे मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का पालन करते हुए प्रदान की थी। काबिलेगौर है कि इन मदरसों का फोकस सिर्फ धार्मिक शिक्षा पर है और इस्लाम धर्म के कथित ठेकेदार, मौलवी और मुल्ले नहीं चाहते कि मुस्लिम बच्चे देश की मुख्याधारा से जुडें।
मेरे विचार मे शिक्षा की मुख्याधारा ही मुस्लिम समुदाय को देश की मुख्यधारा के साथ जोड़ सकती है, लेकिन इस्लाम के यह कथित ठेकेदार मुख्यधारा की शीक्षा को अपनी दुकानदारी के लिए बड़ा खतरा मानते है। बाल अधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट मे कहा है कि बड़ी संख्या मे मुस्लिम बच्चे स्कूल नहीं जाते और 2021-22 के आंकडो के अनुसार करीब 1.2 करोड़ बच्चे औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर रहे है। एक जानकारी के अनुसार इन मदरसों मे जाने वाले बच्चो को एक विशेष एजेंडे पर काम करने के लिए तैयार किया जाता है। हालांकि इन मदरसों मे पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है लेकिन धर्म के ठेकेदार इससे बेपरवाह नजर आते है। खैर असम सरकार ने इन्हे कहा है कि वह मदरसों मे मुख्यधारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें अन्यथा उनकी सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाएगी। मेरे विचार मे सभी राज्यों को इन मदरसो की समीक्षा कर उचित निर्देश जारी करने चाहिए और निर्देशों का अनुपालन न करने पर सरकारी फंडिंग बंद कर देनी चाहिए। केंद्र सरकार को भी तुरंत मदरसों को शिक्षा का अधिकार कानून (आर .टी.ई) की मिली छूट खत्म कर देनी चाहिए और एक राष्ट्र एक शिक्षा की ओर अग्रसर होना चाहिए।
#आज_इतना_ही।