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*कुलदीप सिंह राठौर: कांग्रेस के ज़मीर की आवाज़ और कार्यकर्ताओं की उम्मीद*

"कुलदीप सिंह राठौर: वो आवाज़ जो अब भी कांग्रेस में ज़िंदा है"

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कुलदीप सिंह राठौर: कांग्रेस के ज़मीर की आवाज़ और कार्यकर्ताओं की उम्मीद

Tct ,bksood, chief editor

जब राजनीति मंच पर शोर बहुत हो लेकिन सार कम हो, तब कोई एक चेहरा ऐसा उभरता है जो न सिर्फ सच्चाई बोलने का साहस रखता है, बल्कि उस सच्चाई को जीता भी है। हिमाचल कांग्रेस में यह चेहरा कोई और नहीं, वरिष्ठ नेता कुलदीप सिंह राठौर हैं। कल जिस आत्मविश्वास और निर्भीकता से उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी और पीड़ा को सार्वजनिक मंच पर उठाया, उसने यह साबित कर दिया कि आज भी पार्टी में कोई ऐसा नेता जीवित है जो कार्यकर्ताओं की नब्ज़ पहचानता है, उनकी भावनाओं को समझता है और उनके हक़ के लिए सीना तान कर खड़ा हो सकता है।

कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद जहां ज़्यादातर नेता आरामतलब हो गए या सत्ता के दबाव में आकर चुप्पी साध गए, वहीं राठौर ने अपनी आवाज़ बुलंद की। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंच पर मौजूद नेताओं की उपस्थिति में साफ शब्दों में कहा कि “कांग्रेस कार्यकर्ता को लग ही नहीं रहा कि उनकी सरकार है।” यह वाक्य मात्र एक टिप्पणी नहीं, बल्कि उस गहरे असंतोष का इज़हार था जो ज़मीनी कार्यकर्ता लंबे समय से महसूस कर रहा था लेकिन कह नहीं पा रहा था।

राठौर का यह आक्रामक तेवर उनके नेतृत्व के दौर की याद दिलाता है, जब उन्होंने एक के बाद एक चुनाव जीतकर कांग्रेस को मजबूत किया था। ठियोग जैसी सीट, जहां पिछली बार कांग्रेस की ज़मानत तक जब्त हो गई थी, वहां से ऐतिहासिक जीत दर्ज करवाना आसान नहीं था, पर राठौर ने यह कर दिखाया। यह सिर्फ उनके रणनीतिक कौशल का प्रमाण नहीं, बल्कि यह उनके सबको साथ लेकर चलने वाले राजनीतिक दर्शन की मिसाल भी है।

एक प्रखर अधिवक्ता, शिक्षित विचारशील नेता के रूप में राठौर न सिर्फ प्रदेश की प्रशासनिक ज़रूरतों को समझते हैं, बल्कि संगठन की भीतरी धड़कन को भी महसूस करते हैं। कार्यकर्ताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसे कर्मठ, अनुभवी और विचारवान नेता को आखिर कांग्रेस आलाकमान ने अब तक कोई बड़ी जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी?

आज जब राजनीति अवसरवादिता और चाटुकारिता के चौराहे पर खड़ी है, तब कुलदीप सिंह राठौर जैसे नेता पार्टी के ज़मीर की तरह सामने आते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि विपक्ष में रहते हुए भी पार्टी को मजबूत रखा जा सकता है, और सत्ता में आकर भी सच्चाई के साथ खड़ा रहा जा सकता है।

कार्यकर्ताओं का आत्मबल, संगठन की मजबूती और सत्ता में बैठी सरकार की जवाबदेही तभी कायम रह सकती है जब मंच पर कुलदीप सिंह राठौर जैसी आवाजें गूंजती रहें। उनकी कल की हुंकार न सिर्फ मंच की, बल्कि पूरे प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज़ थी।

 

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