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#जनमंच :-पालमपुर–हमीरपुर हाईवे विस्तार में नेताओं की अनदेखी , कांगड़ा–हमीरपुर की जीवनरेखा पर सरकार की चुप्पी

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पालमपुर–हमीरपुर हाईवे विस्तार में नेताओं की अनदेखी , कांगड़ा–हमीरपुर की जीवनरेखा पर सरकार की चुप्पी

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पालमपुर। (bksood chief editor)
कांगड़ा और हमीरपुर जिलों को जोड़ने वाला पालमपुर–हमीरपुर हाईवे वर्षों से क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन आज यही सड़क प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक अनदेखी का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। पालमपुर, बैजनाथ, जोगिंदरनगर सहित दर्जनों क्षेत्रों के हजारों लोग रोज़ इसी मार्ग से सफर करते हैं, मगर इसके चौड़ीकरण की मांग दशकों से सिर्फ कागजों में सिमटी हुई है।
यह मार्ग पालमपुर के चाय बागान क्षेत्र, बैजनाथ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के धार्मिक पर्यटन स्थल और जोगिंदरनगर के औद्योगिक व जलविद्युत केंद्र को हमीरपुर, शिमला और चंडीगढ़ से जोड़ता है। इसके बावजूद सड़क आज भी कई स्थानों पर इतनी संकरी है कि दो वाहन एक साथ निकलने में भी खतरा बना रहता है। रोज़ाना भारी वाहन, बसें, एंबुलेंस और स्कूली गाड़ियां इसी संकरे रास्ते से गुजरती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन सड़क ढांचा दशकों पुराना है। नतीजा—ट्रैफिक जाम, घंटों की देरी, बार-बार हादसे और लोगों की जान जोखिम में। मानसून के दौरान गड्ढे, फिसलन और तीखे मोड़ इस मार्ग को और भी खतरनाक बना देते हैं। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?
सूत्र बताते हैं कि लोक निर्माण विभाग द्वारा हाईवे चौड़ीकरण की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। बावजूद इसके, वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो परियोजना को मंजूरी मिली और न ही बजट स्वीकृत हुआ। साफ है कि मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। एक नागरिक ने दो टूक कहा,
“यह सड़क हमारे लिए केवल रास्ता नहीं, बल्कि अस्पताल, रोज़गार और शिक्षा से जुड़ा सवाल है। हर चुनाव में वादे होते हैं, लेकिन काम शून्य है।”
अब क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों का साफ कहना है कि जोगिंदरनगर, बैजनाथ पालमपुर जयसिंहपुर, सुलह, नगरोटा और हमीरपुर के सभी विधायकों तथा कांगड़ा व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसदों को बयानबाज़ी छोड़कर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से निजी रूप से मिलना चाहिए और इस परियोजना को हर हाल में मंजूरी दिलवानी चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि चाहें तो यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हो सकता है, जिससे केंद्र से सीधा फंड और तेज़ कार्य संभव है।
लोग सवाल कर रहे हैं कि जब दूसरे राज्यों में सड़क परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, तो कांगड़ा–हमीरपुर की यह महत्वपूर्ण सड़क क्यों उपेक्षित है? क्या क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की आवाज़ दिल्ली तक कमजोर पड़ रही है, या फिर जानबूझकर इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है? अभी कल ही हिमाचल के मुख्यमंत्री की सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात हुई परंतु बताया जा रहा है कि इस रोड के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई जबकि मुख्यमंत्री खुद हमीरपुर से ताल्लुक रखते हैं।
फिलहाल पालमपुर, बैजनाथ और जोगिंदरनगर सुजानपुर के लोग मजबूरन इंतजार कर रहे हैं, लेकिन धैर्य अब जवाब देने लगा है। जनता साफ कहना चाहती है कि अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। यदि समय रहते पालमपुर–हमीरपुर हाईवे का विस्तार नहीं हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होना तय है।
— ट्राई सिटी टाइम्स न्यूज़

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