*लाखों की सैलरी ठुकराकर सिर्फ एक रुपये महीने में जनसेवा को अपनाया: गोकुल बुटेल बने मिसाल*
अमेरिका की नौकरी छोड़ी, ₹1 में निभा रहे दायित्व — गोकुल बुटेल का अनोखा संकल्प


₹1 का मानदेय, लाखों का त्याग: युवा आईटी विशेषज्ञ गोकुल बुटेल ने चुनी जनसेवा की राह।

प्रदेश की सेवा के अपने संकल्प के अनुरूप मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान सलाहकार (आईटी) गोकुल बुटेल इस वर्ष भी मात्र ₹1 का मानद honorarium लेकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी प्रकार का TA/DA या अन्य भत्ते स्वीकार नहीं करते। इतना ही नहीं, सरकारी वाहन से संबंधित शुल्क तथा अपने निवास से जुड़े सभी खर्च भी वे स्वयं वहन करते हैं।
उनके कार्यालय द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को भेजा गया उत्तर तथा जमा की गई राशि की रसीदें भी सार्वजनिक की गई हैं, जो उनकी पारदर्शिता और जवाबदेही को दर्शाती हैं।
बताया जाता है कि एक युवा प्रोफेशनल के रूप में गोकुल बुटेल अमेरिका में लगभग ₹3 लाख प्रतिमाह के वेतन पर कार्य कर चुके हैं। तकनीकी क्षेत्र में उनके अनुभव, वैश्विक exposure और विशेषज्ञता को देखते हुए आज निजी क्षेत्र में उनकी आय ₹6 लाख प्रतिमाह या उससे अधिक भी हो सकती थी।
लेकिन उन्होंने सुविधाओं, उच्च वेतन और व्यक्तिगत उन्नति के बजाय प्रदेश और देश की सेवा को प्राथमिकता दी।
प्रदेश की वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों के बीच जहाँ संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता है, वहीं लगभग ₹2.5 लाख प्रतिमाह के निर्धारित वेतन को त्यागकर केवल ₹1 का प्रतीकात्मक मानदेय स्वीकार करना एक सशक्त नैतिक संदेश देता है। मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत सलाहकारों में वे ऐसे एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने यह रास्ता चुना है।
डिजिटल गवर्नेंस, आईटी नवाचार और प्रशासनिक आधुनिकीकरण के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। ‘हिम परिवार’ जैसी डिजिटल पहलों को आगे बढ़ाने और तकनीक के माध्यम से आम नागरिकों तक सेवाएँ सरल बनाने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
उनका स्पष्ट संदेश है —
“मेरे लिए पद नहीं, सेवा महत्वपूर्ण है।”
आज जब राजनीति और प्रशासन में वेतन, सुविधाओं और भत्तों को लेकर बहस होती है, ऐसे समय में एक युवा प्रोफेशनल का लाखों की संभावित आय छोड़कर प्रतीकात्मक ₹1 में कार्य करना केवल एक निर्णय नहीं, बल्कि एक विचारधारा को दर्शाता है।
यह कदम न केवल प्रशासनिक सादगी का उदाहरण है, बल्कि युवाओं के लिए भी यह संदेश है कि यदि संकल्प सच्चा हो, तो सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान बन जाती है। इतनी कम उम्र में उन्होंने नेताओं को भी यह संदेश दिया है कि यदि मन मे जन सेवा की भावना हो तो वेतन मायने नहीं रखता।
वे अपने नॉलेज को जन सेवा में प्रयुक्त करना चाहते हैं इसीलिए वह पाठक मेहनत करते हैं दिन में 18 घंटे तक भी काम करते हैं तथा प्रदेश कैसे उन्नति करें आने वाले 5-10 सालों में प्रदेश कैसे आत्मनिर्भर बन जाए वह इस बारे में सोचते रहते हैं और नए-नए आइडियाज सरकार को देते रहते हैं



