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*“1868 से जलती शिक्षा की लौ बुझाने की तैयारी? शासन के फैसले पर पालमपुर में उबाल”*

“बेटियों की पाठशाला या प्राइम जमीन? 158 साल पुराने कन्या स्कूल पर क्यों चला मर्जर का बुलडोज़र!”

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पालमपुर कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के इतिहास से खिलवाड़ या जमीन का खेल? कन्या विद्यालय के मर्जर पर उठे तीखे सवाल”

Tct ,bksood, chief editor

धौलाधार की सुरम्य वादियों के बीच बसा 158 वर्ष पुराना St. Anne’s Girls High School, जिसे आज राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पालमपुर के नाम से जाना जाता है, केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि इतिहास, विरासत और बेटियों के आत्मसम्मान का प्रतीक है। वर्ष 1868 में मंडी रियासत के राजा विजय सेन द्वारा रखी गई इसकी नींव ने समय के साथ अनेक परिवर्तन देखे, पर इसकी पहचान हमेशा बेटियों को सुरक्षित, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले विद्यालय के रूप में बनी रही। 1921 में मिशनरी प्रबंधन, 1973 में सरकारी अधिग्रहण और उच्च विद्यालय का दर्जा, तथा 2007 में वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक स्तरोन्नति—यह सफर अपने आप में गौरवगाथा है।
इस विद्यालय की उपलब्धियां केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहीं। 1997 में योग विषय की शुरुआत के बाद छात्राओं ने न केवल स्कूल बल्कि प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिनिधित्व किया। दिल्ली, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आयोजित प्रतियोगिताओं तथा योग ओलंपियाड में पुरस्कार प्राप्त कर स्कूल का नाम रोशन किया। 2017 में संगीत (वादन) विषय शुरू होने के बाद छात्राओं ने सांस्कृतिक मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और प्रदेश स्तर पर कई कीर्तिमान स्थापित किए।
विद्यालय का पुस्तकालय इसकी बौद्धिक धरोहर है। 1973 में मात्र 150 पुस्तकों से शुरू हुई लाइब्रेरी आज 2000 से अधिक पुस्तकों, समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, रोजगार समाचार, सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री से समृद्ध है। 2008 में इसे पब्लिक लाइब्रेरी का दर्जा मिला। 2015 में पुस्तकालय कक्ष के विस्तार और बुक बैंक की स्थापना से निर्धन परिवारों की +1 और +2 की छात्राओं को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करवाई जाने लगीं, ताकि आर्थिक अभाव शिक्षा में बाधा न बने। लाइब्रेरी पीरियड में छात्राएं स्वयं अध्ययन कर अपनी शैक्षणिक नींव मजबूत करती हैं।
विद्यालय का Jasmine Eco Club पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय रहा है। पर्यावरण दिवस, विश्व जल दिवस, पृथ्वी दिवस, विश्व स्वास्थ्य दिवस, स्वच्छता दिवस, नशा मुक्ति अभियान, रैलियां और स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहे हैं। स्कूल परिसर के सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी भी इसी क्लब ने बखूबी निभाई है। 3 सितंबर 2014 को स्थापित आईसीटी लैब में कंप्यूटर सिस्टम, एलसीडी, प्रोजेक्टर (K-Yan) और लेजर प्रिंटर के माध्यम से छात्राओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ा गया।
इतने व्यस्त बाजार क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद विद्यालय में आज तक कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। अनुशासन इसकी सबसे बड़ी पहचान रहा है। वर्तमान में शायद सीनियर विंग में 251 और प्राइमरी सहित कुल 371 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इस वर्ष भी जमा दो की परीक्षा में एक छात्रा ने प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त कर विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को सिद्ध किया है। खेल प्रतियोगिताओं में भी छात्राएं लगातार अव्वल रही हैं।
ऐसे में इस ऐतिहासिक कन्या विद्यालय को घुग्घर के को-एजुकेशन स्कूल में मर्ज करने का निर्णय छात्राओं, अभिभावकों और पूर्व छात्राओं के लिए गहरा आघात है। दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपनी बेटियों को यहां सुरक्षित वातावरण में पढ़ने भेजते रहे हैं। अब परिवहन और सुरक्षा संबंधी व्यावहारिक चिंताएं स्वाभाविक रूप से सामने आ रही हैं।
पूर्व छात्राएं भावुक होकर कह रही हैं कि यह केवल एक स्कूल नहीं, उनका बचपन, उनकी यादें और उनकी पहचान है। जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि जब छात्राओं की संख्या पर्याप्त है, उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं और विद्यालय का इतिहास 158 वर्षों का है, तो आखिर इसे मर्ज करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या शहर के बीचोंबीच स्थित इस प्राइम भूमि पर किसी और की नजर है?
पालमपुर की जनता शासन-प्रशासन से मांग कर रही है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। 1868 से जलती आ रही शिक्षा की यह लौ केवल एक प्रशासनिक आदेश से बुझा दी गई तो यह केवल एक स्कूल का समापन नहीं होगा, बल्कि बेटियों की सुरक्षा, विरासत और भावनाओं पर गहरी चोट होगी।

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