*बुटेल चौक से मंगलानी चौक तक 300 मीटर की सीवरेज लाइन पर 6 महीने में भी नहीं हुआ पूरा — अफसर मस्त, जनता त्रस्त*


बुटेल चौक से मंगलानी चौक तक 300 मीटर की सीवरेज लाइन पर 6 महीने में भी नहीं हुआ पूरा — अफसर मस्त, जनता त्रस्त।

पालमपुर:
बुटेल चौक से मंगलानी चौक तक लगभग 300 मीटर लंबी सीवरेज लाइन का कार्य सम्भवतः 3 अक्टूबर को शुरू हुआ था, लेकिन हैरानी की बात है कि पाँच–छह महीने बीत जाने के बाद भी यह छोटा सा काम पूरा नहीं हो पाया। विभागों की सुस्ती और उदासीनता का इससे बड़ा उदाहरण शायद ही कहीं देखने को मिले।
सिर्फ लगभग 300 मीटर के इस मार्ग की हालत पिछले कई महीनों से बदहाल बनी हुई है। खुदाई के कारण धूल-मिट्टी, गड्ढे और कीचड़ से यहां के लोग रोजाना जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति होती तो यह काम छह महीने नहीं बल्कि छह हफ्तों में पूरा हो सकता था।
यह सड़क बुटेल चौक से मंगलानी चौक तक जाती है और पिछले लगभग छह महीनों से इसकी दुर्दशा बनी हुई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग पर समाज के अनेक प्रतिष्ठित और उच्च पदों पर रहे या कार्यरत लोग निवास करते हैं—जिनमें वाइस चांसलर, चीफ इंजीनियर, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, डीन, डायरेक्टर, हेल्थ डायरेक्टर, नेवल ऑफिसर, आर्मी ऑफिसर, प्रोफेसर, इंजीनियर, डॉक्टर और अन्य बुद्धिजीवी शामिल हैं। इसके बावजूद सड़क और सीवरेज कार्य की यह हालत कई सवाल खड़े करती है।
क्षेत्र में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक ही रहते हैं, जो न तो स्कूटी चला पा रहे हैं और न ही गाड़ी निकाल पा रहे हैं। पिछले छह महीनों से वे अपने ही घरों में कैद जैसी स्थिति झेल रहे हैं। धूल और कीचड़ के कारण रोजमर्रा की जिंदगी भी कठिन हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को फोन कर समस्या से अवगत करवाया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का मानना है कि यदि बड़े अधिकारी एक बार इस रास्ते पर पैदल या बाइक से चलकर स्थिति का जायजा लें, तो उन्हें अंदाजा लगेगा कि यहां के नागरिक किस प्रकार की परेशानियों से गुजर रहे हैं।
लोगों में यह चर्चा भी है कि कहीं विभागों की यह लापरवाही वर्तमान शासन और स्थानीय नेतृत्व को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा तो नही है?? क्योंकि जब किसी नेता के निवास से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही हालात इतने खराब हों, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि इस कार्य को तुरंत प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि छह महीनों से धूल, कीचड़ और परेशानी झेल रहे लोगों को राहत मिल सके।
यहां के निवासियों का कहना है कि इस कंपनी की दक्षता कुशलता तथा शीघ्र कार्य प्रणाली को देखते हुए इसे हिमाचल के सभी शहरों के सीवरेज का काम देना चाहिए कि ताकि वहां के लोग भी परेशान होकर इस तरह की परेशानियां झेलें। या इस कंपनी को राष्ट्रपति का दक्षता प्रमाण पत्र या अवार्ड दिलवाना चाहिए!
(ट्राई सिटी टाइम्स)



