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*पूर्व आईएएस अधिकारी पी.सी.के. प्रेम आज पंचतत्व में विलीन हो गए पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने जाताया शोक*

असंख्य प्रतिष्ठित नागरिकों ने भाग लिए – पी.सी.के. प्रेम को श्रद्धांजलि उनके अंतिम संस्कार में प्रशासनिक, साहित्यिक, सामाजिक एवं विभिन्न संस्थाओं से जुड़े असंख्य प्रतिष्ठित नागरिकों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। Rotary Club Palampur, Rotary Club Una सहित अनेक संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों ने उनकी सेवाओं को याद करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया। हिमाचल के प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व आईएएस पी.सी.के. प्रेम का निधन, प्रदेश में शोक की लहर

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🕯️ पंचतत्व में विलीन – पी.सी.के. प्रेम
हिमाचल प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व आईएएस अधिकारी पी.सी.के. प्रेम आज पंचतत्व में विलीन हो गए। आज पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। उनके निधन से प्रदेश में शोक की लहर व्याप्त है और साहित्य जगत ने एक युगपुरुष को खो दिया है।

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पालमपुर/शिमला। हिमाचल प्रदेश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, वरिष्ठ  एवं पूर्व आईएएस अधिकारी पी.सी.के. प्रेम का गत दिवस दुखद निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और 20 फरवरी से मस्तिष्क आघात (ब्रेन स्ट्रोक) के कारण गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में उपचाराधीन थे। उपचार के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे हिमाचल प्रदेश सहित साहित्य, सामाजिक और प्रशासनिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है।
पी.सी.के. प्रेम का जन्म 28 सितंबर 1945 को पालमपुर क्षेत्र के गढ़ मल्खेर गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने वर्ष 1970 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और अपने कार्यकाल में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए एक कुशल एवं संवेदनशील प्रशासक के रूप में पहचान बनाई।
उन्होंने शिमला के उपायुक्त, निदेशक जनसंपर्क सहित कई अहम प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कीं। प्रशासन के साथ-साथ वे शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से भी निरंतर जुड़े रहे।
साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान
पी.सी.के. प्रेम केवल एक प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार भी थे। उन्होंने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में 70 से अधिक पुस्तकों की रचना की। अंग्रेज़ी में उनके 9 काव्य संग्रह, 6 उपन्यास और 4 कहानी संग्रह प्रकाशित हुए, जबकि हिंदी में उन्होंने 20 उपन्यास और 9 कहानी संग्रह लिखे।
उनकी चर्चित कृतियों में ए हैंडसम मैन, रेनबोज़ ऐट डॉन, इट शैल बी ग्रीन अगेन, ए स्लिंगिंग बैग एंड अदर स्टोरीज़, अमंग द शैडोज़, दोज़ डिस्टेंट होराइज़न्स और ययाति रिटर्न्स प्रमुख हैं।
उनका अंग्रेज़ी उपन्यास ए हैंडसम मैन वर्ष 2002 में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय इम्पैक डबलिन साहित्य पुरस्कार के लिए चयनित हुआ था, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति का प्रमाण है।
हिंदी साहित्य में उनकी बहु-खंडीय कृति कालखंड (पांच खंड, लगभग 2300 पृष्ठ) को हिंदी के सबसे विस्तृत और महत्वपूर्ण उपन्यासों में गिना जाता है।
शोध एवं आलोचना में भी योगदान
उन्होंने भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य और कविता पर भी गंभीर एवं शोधपरक लेखन किया। उनके प्रमुख आलोचनात्मक ग्रंथों में समकालीन भारतीय अंग्रेज़ी कविता (हिमाचल से), भारत में अंग्रेज़ी कविता: एक व्यापक सर्वेक्षण और समय और निरंतरता शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त भारतीय संस्कृति और पुराणों पर भी उनका गहन अध्ययन रहा। उनकी हालिया कृतियों में श्रीमद भागवत महापुराण – जैसा मैं समझता हूं (तीन खंड), सनातन सत्य – प्राचीन भारतीय साहित्य के कुछ पृष्ठ (2024) और संकलित कविताएं (चार खंड) उल्लेखनीय हैं।
सम्मान और उपलब्धियां
पी.सी.के. प्रेम को ‘भारत हिंदी रत्न’ सहित 20 से अधिक साहित्यिक एवं सामाजिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें हिमाचल प्रदेश राज्य गुलेरी पुरस्कार और अकादमी पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया।
उनके साहित्यिक योगदान पर कई विद्वानों ने शोध किया और उनके जीवन व कृतित्व पर पुस्तकें भी लिखी गईं, जो उनकी साहित्यिक प्रतिष्ठा को दर्शाती हैं।
परिवार एवं अंतिम संस्कार
वे अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। अपने जीवन के अंतिम समय तक वे पालमपुर में रहकर साहित्य सृजन में सक्रिय रहे। उनका अंतिम संस्कार आज पूरे सम्मान के साथ संपन्न किया गया।
विभिन्न संस्थाओं ने जताया शोक
हिमोत्कर्ष साहित्य, संस्कृति एवं जनकल्याण परिषद, Rotary Club Una, Rotary Club Palampur, सेवानिवृत्त आईएएस आरसी कपिल तथा रोसेट संस्था सहित अनेक सामाजिक एवं साहित्यिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अपूर्णीय क्षति
पी.सी.के. प्रेम का जीवन प्रशासनिक उत्कृष्टता और साहित्यिक साधना का अद्वितीय संगम रहा। उनके निधन से हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में संबल दें।

 

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