#Plasticwaste :पालमपुर का प्लास्टिक संकट: कचरा जो कभी नष्ट नहीं होता!


पालमपुर का प्लास्टिक संकट: कचरा जो कभी नष्ट नहीं होता!

पालमपुर बीके सूद चीफ एडिटर TCT
पालमपुर की हरी-भरी वादियों में पर्यावरण प्रदूषण का एक खतरनाक रूप उभर रहा है—प्लास्टिक कचरा। प्लास्टिक ऐसा पदार्थ है जो कभी नष्ट नहीं होता। वैज्ञानिकों के अनुसार, सामान्य प्लास्टिक बैग या बोतल को पूरी तरह विघटित होने में 400 से 1000 साल लग सकते हैं। यह न तो गलता है, न सड़ता है, बल्कि छोटे-छोटे कणों में टूटकर मिट्टी, पानी और हवा में घुलमिल जाता है। परिणामस्वरूप, यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जीव-जंतुओं और इंसानों के लिए जहर बन जाता है।
पालमपुर शहर के प्रसिद्ध गुरुद्वारा परिसर के सामने एक छोटा-सा नाला इसका जीता-जागता प्रमाण है। इस नाले में चार-पांच फुट ऊंचा प्लास्टिक कचरा जमा हो चुका है, जो शायद पिछले 10 वर्षों में एकत्रित हुआ होगा। आश्चर्यजनक रूप से, इस ढेर में एक भी कण गला-सड़ा नहीं है—सब वैसा का वैसा पड़ा हुआ है। प्लास्टिक के थैलें, बोतलें, कप और पैकेट नाले को पूरी तरह अवरुद्ध कर चुके हैं। वर्षा के दौरान यह कचरा बहकर आसपास के खेतों और बीस नदी तक पहुंच जाता है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है।
यह स्थिति कितनी खतरनाक है? प्लास्टिक कचरा मिट्टी की उर्वरता नष्ट करता है, पशु-पक्षियों की मौत का कारण बनता है और मानव स्वास्थ्य के लिए घातक है। सूक्ष्म प्लास्टिक कण मछलियों और सब्जियों के माध्यम से हमारे भोजन में पहुंचते हैं, जो कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और श्वसन रोगों को जन्म देते हैं। पालमपुर जैसे पर्यटन स्थल पर यह न केवल सौंदर्य बिगाड़ता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाता है।
नगर निगम पालमपुर अपनी ओर से काफी कोशिशें कर रहा है—नियमित सफाई अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने का प्रयास। लेकिन इन कोशिशों को सफल बनाने के लिए नागरिकों का सहयोग अनिवार्य है। हम सभी को प्लास्टिक का उपयोग कम करना होगा, कचरा अलग-अलग करें और सफाई में भाग लें। गुरुद्वारा समिति और स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर पुनर्चक्रण केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
यदि हम सब एकजुट हों, तो पालमपुर को प्लास्टिक-मुक्त बनाना संभव है। आइए, नगर निगम की कोशिशों को मजबूती दें और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करें!




