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सवर्ण_प्रदर्शन_और_फिर_सवर्ण_आयोग_के_गठन_की_घोषणा) —

बी के सूद मुख्य संपादक

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Bksood chief editor

12 दिसंबर 2021– (#सवर्ण_प्रदर्शन_और_फिर_सवर्ण_आयोग_के_गठन_की_घोषणा) —

आजकल हिमाचल विधानसभा का सत्र धर्मशाला मे चल रहा है। 10 दिसंबर को सत्र का पहला दिन था और हिमाचल मे सवर्ण आयोग का गठन हो इस मांग को लेकर सवर्ण समाज की ओर से जबरदस्त प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह एक प्रभावशाली प्रदर्शन था और सारे प्रदेश से सैंकड़ों प्रदर्शनकारी सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर धर्मशाला पहुंचे थे। इससे पहले भी इस मांग को लेकर जिला स्तर पर और शिमला सचिवालय के सामने धरना-प्रदर्शन किए जा चुके थे। इसी प्रकार इस मांग को लेकर हरिद्वार तक एक पद यात्रा का आयोजन भी किया गया था। अभी तक सरकार लगातार इस मांग पर विचार करने का आश्वासन ही दे रही थी, हांलाकि इस आयोग के गठन को पहला समर्थन चुने हुए किसी प्रतिनिधि की ओर से यदि मिला था वह समर्थन कांग्रेस के युवा विधायक विक्रमादित्य सिंह का था। उनके इस समर्थन को कांग्रेस पार्टी ने अनुमोदित नहीं किया था। जब भी सवर्ण आयोग की मांग को लेकर सवर्ण समाज के लोग मुख्यमंत्री जी से मिले तो उन्होने इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का विश्वास जरूर दिलाया था। खैर धीरे-धीरे आगे बढ़ते इस आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही और मुख्य मंत्री जयराम जी ने धर्मशाला मे मध्य प्रदेश की तर्ज पर हिमाचल मे सवर्ण आयोग के गठन की घोषणा कर दी है।

अभी इस बात पर टिप्पणी नहीं की जा सकती कि इस आयोग के गठन से समान्या वर्ग के लोगो को क्या लाभ होगा। इस पर टिप्पणी करने से पहले इस आयोग के उद्देश्य,काम और शर्तों का अध्ययन करना आवश्यक है। खैर इस एक मांग को लेकर जिस तरह से यह आन्दोलन खड़ा हुआ और सारे प्रदेश से लोग एक अच्छी संख्या मे धर्मशाला पहुंचे। इस आन्दोलन की पृष्टभूमि का विवेचनात्मक अध्ययन राजनैतिक विद्यार्थियों के लिए दिलचस्प होगा, हालांकि राजनैतिक लोगो ने अभी तक कोई विरोध तो नहीं किया है , लेकिन कुछ लोगो ने अपनी बात के साथ किन्तु परन्तु का प्रयोग जरूर किया है। जब मैने इस आन्दोलन के समर्थक और धर्मशाला प्रदर्शन के सहभागी से इस आन्दोलन की पृष्ठभूमि जानने के लिए बात की तो उन्होने नपे तुले शब्दों मे जबाव दिया और कहा कि कभी- कभी ऐसे आन्दोलन किसी क्रिया की प्रतिक्रिया के चलते भी जन्म ले लेते है। उन्होने आगे कहा कि इस अभियान की शुरुआत बहुत ही छोटे स्तर पर एक कानून के दुरुपयोग के विरोध से हुई थी और आज यह आन्दोलन इस रूप मे यहां पहुंच गया है।

 

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