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*भारत_मे_संसदीय_प्रणाली_हो रही_कमजोर)-*

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Tct chief editor

09 अप्रैल 2023- (#भारत_मे_संसदीय_प्रणाली_हो रही_कमजोर)-

भारत मे लोकतंत्र की संसदीय प्रणाली कार्यरत है। मेरी समझ मे संसद इस प्रणाली की आत्मा है और वहां पर होने वाली सकारात्मक चर्चा, वाद-विवाद और जनप्रतिनिधियों के भाषण इस प्रणाली के प्राण है। अब संसद के कामकाज मे से चर्चा, वाद-विवाद और सांसदो के भाषण लुप्त हो रहे है। इस प्रकार वह समय दूर नहीं जब संसदीय सिस्टम के प्राण फकेरू हो जाएगें। संसदो के दोनो सदनो को वीरवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थागित कर दिया गया है। स्मरण रहे विभिन्न मुद्दों पर हुए हंगामे एव गतिरोध के कारण बजट सत्र के दौरान लोकसभा मे महज 34 प्रतिशत और राज्यसभा मे मात्र 24.4 प्रतिशत काम ही हो सका है। प्रतिष्ठित दैनिक मे छपी रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा मे 133.6 घंटे की निर्धारित अवधि मुकाबले 45 घंटे जबकि राज्यसभा मे 130 घंटे की निर्धारित अवधि के मुकाबले 31 घंटे कामकाज हुआ है। दोनो सदनों मे व्यवधान का असर प्रश्नकाल पर भी पड़ा है। पूरे बजट सत्र के दौरान मे लोकसभा मे प्रश्नकाल 4.32 घंटे ही चला और राज्यसभा मे सिर्फ 2.35 ही चल सका। दिलचस्प बात यह है कि व्यवधान डालने मे सत्तापक्ष और विपक्ष दोनो का योगदान रहा।

इस सारे गतिरोध पर राज्यसभा के सभापति की टिप्पणी बहुत सही है। उन्होने इस सारे घटनाक्रम और गतिरोध पर चिंता जताते हुए कहा “जनता की नजरों मे हम सब उपेक्षा और उपहास के पात्र बन रहे है”। लोकसभा के स्पीकर ने इस तरह के व्यवधान को संसदीय प्रणाली के लिए खतरा बताया है। चर्चा और बहस हुए बिना विधेयक पास हो जाना संसदीय प्रणाली के लिए अच्छा नहीं है। लोकसभा स्पीकर और राज्यासभा के अध्यक्ष भले चिंता व्यक्त कर रहे है लेकिन वह स्वयं भी सदन को व्यवधान मुक्त चलाने की अपनी असफ़लता की जिम्मेदारी से बच नही सकते है। गैर जरूरी विषयों को लेकर हो हल्ला करना और जनहित के मुद्दों पर चर्चा न होने देना करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है। मेरे विचार मे इसके लिए दोनो सत्तारूढ़ दल और विपक्ष जिम्मेदार है। सभी सांसदो पर “काम नहीं तो दाम नहीं ” का नियम लागू होना चाहिए। जो भी सांसद व्यवधान डालता है या सदन से गैर हाजिर रहता है उसे उस दिन के वेतन और भत्ता नहीं मिलना चाहिए। यदि संसद की कार्यप्रणाली मे सुधार नहीं होता तो संसदीय प्रणाली के बारे मे पुनर्विलोकन करना होगा और लोकतंत्र के ही दायरे मे ऐसी प्रणाली लाने पर विचार करना होगा जो देश और नागरिकों के प्रति अधिक उत्तरदायी हो।

Mohinder Nath Sofat Ex.Minister HP Govt.

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।

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