#bksood chief editor

मैं पिछले कई वर्षों से लिख रहा हूं कि उच्चतम न्यायालय को एक स्वत संज्ञान लेकर किसी को भी रोड ब्लॉक करने के खिलाफ एक आदेश पारित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति, संगठन या संस्था या यूनियन सड़क पर प्रदर्शन करके सड़क को नहीं रोक सकता, चाहे वह थल मार्ग हो या रेल मार्ग हो ।
आज प्रधानमंत्री को इन प्रदर्शनकारियों ने 20 मिनट तक रोके रखा ।कुछ अनहोनी घटना हो जाती तो कौन जिम्मेवार था?? देश के प्रधानमंत्री का रास्ता रोक दिया गया, यह बड़े शर्म की बात है, और लोकतंत्र का मजाक है। प्रधानमंत्री जी के साथ इतनी सुरक्षा थी,तब भी वे कितने परेशान हुए सब जानते हैं, परंतु कोई आम आदमी, बीमार आदमी, दफ्तर जाने वाला आदमी ,अकेली महिला,बूढ़े बुजुर्ग इस तरह के जाम में फंस जाए , कोई बीमार आदमी जो सीरियसली बीमार हो ऒर उसकी की जान पर बन आये उसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या यह हमारे आंदोलन के अधिकार का दुरुपयोग नहीं है? हमें आंदोलन करने का पूरा हक है ,लेकिन वह आंदोलन अगर किसी के लिए असुविधा का कारण बन जाए किसी की जान पर बनाए कोई परेशान हो जाए यह किसी को इजाजत नहीं होनी चाहिए…. सड़क जाम और आंदोलन के कारण किसी की रोजी-रोटी पर बंद हो जाती है (किसान आन्दोलन उदहारण है) किसी का रोजगार छिन जाए, किसी की नौकरी चली जाए, किसी की जान चली जाए यह अधिकार किसी भी आंदोलनकारियों को किसने दिया??
ना जाने उच्चतम न्यायालय कब इस विषय पर संज्ञान लेगा क्योंकि राजनीतिक पार्टियां तो इस पर राजनीति करती रहेंगी, परंतु सुप्रीम कोर्ट से अब उम्मीद है कि विषय की गंभीरता को समझते हुए वह आम नागरिकों की इस समस्या का अवश्य कोई हल निकालेगा।
अगर किसी को किसी अधिकारी या नेता से या किसी संस्थान से कोई परेशानी है तो वे लोग उस अधिकारी के दफ्तर को सीज कर सकते हैं, उस नेता के घर को घेर सकते हैं, नेता के दफ्तर को घेर सकते हैं ।
वे रामलीला मैदान में बैठ सकते हैं ,जंतर मंतर पर बैठ सकते हैं, किसी स्टेडियम में बैठ सकते हैं, लेकिन उन्हें सड़क पर बैठने की कोई इजाजत नहीं होनी चाहिए। किसी को भी परेशानी में डालने की किसी को कोई हक नहीं, और साथ ही साथ सड़कों पर जो यह धार्मिक जुलूस निकलते हैं उन पर भी पाबंदी होनी चाहिए। हमें अगर कोई आयोजन करना है तो वह खुले मैदान में करें जहां पर किसी को कोई परेशानी ना हो।
पीएम ने तो आज चन्नी का धन्यवाद कर दिया ,परंतु पीएम जी आपके साथ तो इतनी सुरक्षा थी आप तो वापिस चले गए आपको सारा रोड भी खुला मिल गया, परंतु आम जनता की सोचिए जो कई कई किलोमीटर लम्बे के जाम में फंसे रहते हैं वह ना आगे जा सकते हैं ना पीछे जा सकते हैं । गर्मी हो सर्दी हो अपनी गाड़ियों में बसों में ऐसे बैठे रहते हैं जैसे उन्होंने कोई गुनाह कर दिया हो ।
सबसे पहले तो पीएम को ही इस विषय में संज्ञान लेना चाहिए परंतु ऐसा होने वाला नहीं है शायद, इसलिए सुप्रीम कोर्ट से ही हमें उम्मीद करनी चाहिए कि वह ही इस विषय पर कोई आवश्यक कार्यवाही करेगा।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट स्वत ही संज्ञान लेगा ऐसी जनता की उम्मीद है।