*पालमपुर का रियल सोना: सोना सूद — सादगी, सेवा और समर्पण की जीवंत मिसाल!*
“सोना सूद: त्याग, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा से बनी पहचान”

पालमपुर का रियल सोना: सोना सूद — सादगी, सेवा और समर्पण की जीवंत मिसाल!

यह बात हम सभी भली-भांति जानते हैं कि असली सोने की कीमत कभी कम नहीं होती। समय चाहे जैसा भी हो, परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, सोना अपनी चमक और मूल्य बनाए रखता है। बिल्कुल उसी तरह कुछ इंसान भी होते हैं, जिनकी अच्छाई, सच्चाई और इंसानियत किसी भी हालात में कम नहीं होती, बल्कि समय के साथ और निखरती चली जाती है।
पालमपुर की ऐसी ही एक जानी-मानी और सम्मानित शख्सियत हैं सोना सूद, जिन्हें लोग प्यार और गर्व से “पालमपुर का रियल सोना” कहते हैं।
सोना सूद का नाम पालमपुर में केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और मानवता की पहचान के रूप में लिया जाता है। समाज सेवा हो, धार्मिक कार्य हों या पारिवारिक जिम्मेदारियाँ—हर क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक है।
इंसानियत के पैमाने पर देखें तो उनके जैसा समर्पण और संवेदनशीलता आज के समय में बहुत कम देखने को मिलती है।
सोना सूद का स्वभाव बेहद सरल, विनम्र और सहयोगी है। वे हर परिस्थिति में आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाने वाली महिला हैं। चाहे हालात कितने ही कठिन क्यों न हों, वे कभी पीछे हटना नहीं जानतीं। बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने और हर कार्य को पूरे मन से करने का जज़्बा उनके स्वभाव में रचा-बसा है। सामाजिक हो या धार्मिक—वे सिर्फ नाम के लिए जुड़ी हुई सदस्य नहीं हैं, बल्कि तन, मन और धन से सेवा करने वाली सच्ची कर्मयोगिनी हैं।
पालमपुर की अनेक सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से उनका गहरा और सक्रिय जुड़ाव है। वे हर कार्यक्रम, हर सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं और जहाँ जरूरत होती है, वहाँ सबसे पहले खड़ी नजर आती हैं। उनके लिए सेवा कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
उनका सबसे बड़ा गुण यह है कि वे केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि आर्थिक सहयोग में भी हमेशा आगे रहती हैं। बिना किसी दिखावे, बिना किसी प्रचार के, जितनी जरूरत हो—और कई बार उससे भी अधिक—वे दिल खोलकर सहयोग करती हैं। यही उनकी उदारता, संवेदनशीलता और बड़े दिल का परिचय देता है।
उनके जीवन साथी श्री संतोष सूद भी त्याग, समर्पण और विनम्रता की मिसाल हैं। दोनों का जीवन यह दर्शाता है कि जब पति-पत्नी के विचार, संस्कार और सेवा भाव एक जैसे हों, तो पूरा परिवार समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।
उनका परिवार पालमपुर में अपने सौम्य स्वभाव, सेवा भावना, सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है।
सोना सूद की एक और विशेषता यह है कि वे पारिवारिक रिश्तों में बिना बोले, बिना जताए, मौन भाव से त्याग और समर्पण निभाना जानती हैं। रिश्तों को कैसे संभाला जाता है, बड़ों का सम्मान और अपनों का साथ कैसे दिया जाता है—यह सब उनके व्यवहार से सीखने को मिलता है। उनका जीवन सचमुच एक ऐसी पाठशाला है, जहाँ हर उम्र का व्यक्ति कुछ न कुछ सीख सकता है।
आज के दौर में जब अधिकतर लोग हर छोटे सहयोग के बदले प्रशंसा और प्रचार चाहते हैं, वहीं सोना सूद निस्वार्थ सेवा और निःशब्द दान की परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए हैं। वे जो करती हैं, दिल से करती हैं—बिना किसी अपेक्षा के। यही कारण है कि उनका सम्मान किसी पद, मंच या पहचान का मोहताज नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में अपने आप बस चुका है।
निस्संदेह, हम सभी को सोना सूद और उनके परिवार के जीवन से यह सीख लेने की आवश्यकता है कि
रिश्ते किस तरह निभाए जाते हैं, समाज के प्रति जिम्मेदारी कैसे पूरी की जाती है,
और सच्ची सेवा क्या होती है।
सोना सूद वास्तव में पालमपुर का रियल सोना हैं—ऐसा सोना, जिसकी चमक समय के साथ और भी अधिक उज्ज्वल होती जा रही है।
सोना सूद अपने पति संतोष सूद जी के साथ



