शख्शियत

आज की शख्शियत:- *जगदीप हास्य कलाकार*

TRICITY TIMES आज की शख्सियत

Bksood chief editor tct

Legendary actor….

जगदीप……उर्फ़ सय्यद इश्तीयाक जाफरी

29 मार्च 1939… को जन्मे
और 3 जुलाई 2020 को दिवंगत हुए

..ज़ब जगदीप 7साल के थे तब इनके पिताजी का देहांत हो गया उसके बाद ये और इनकी मां गरीबी से त्रस्त हो कर मुंबई आ गए जहां इनकी माता एक यतीम खाने मे खाना खिलाने का काम करती थी .! बहुत कम पैसे मिलने के बाद भी इनकी माँ जगदीप साहब को स्कूल भेजती.ताकि ये पड़ लिख सकें !

एक दिन नन्हें से जगदीप को ख्याल आया की उनकी कितनी मेहनत करती है क्यों ना मैं पढ़ाई लिखाई छोड़ कर कुछ काम करूं ताकि मेरी माँ को राहत मिले और बच्चे भी तो काम करते हैं, वो कहां पढ़ाई करते है और ये बात इन्होने अपनी माँ से कही की मैं भी दूसरे बच्चो की तरह काम करना चाहता हूं! पढ़ाई लिखाई मे क्या रखा है, अब से मैं भी काम करूंगा ताकि तुम्हे थोड़ा आराम मिला सके, इनकी माँ ने लाख मना किया मगर नन्हें जगदीप नहीं माने और दूसरे बच्चों की तरह कारखाने मे काम करने लगे!

वे पतंग बनाते या गलियों में साबुन बेचते

और एक दिन इनके साथ अजीब किस्सा हुआ दरअसल जिस सड़क पे ये पतंग बेचते उसी सड़क पे एक आदमी आया जो कुछ बच्चो को ढूंढ रहा था जो फ़िल्म मे काम कर सकें और काम भी क्या था बस चुपचाप बैठना था उसनें जगदीप से जब पूछा, क्या फिल्मो मे काम करोगे ? नन्हें जगदीप ने कहा वो क्या होता है क्योंकि कभी फिल्मे देखी नहीं ये तो व्यस्त थे ग़रीबी से लड़ने में, फिल्मे कहा से देखते ! उस आदमी ने कहा कुछ नहीं करना है बस स्टूडियो मे चुपचाप बैठना है जगदीप ने पूछा पैसे मिलेंगे आदमी ने कहा हा पुरे तीन रूपये मिलेंगे तीन रूपये सुन ये काफ़ी ख़ुश हुए और हां कर दी और कहा चलो, आदमी बोला अरे अभी नहीं कल से काम शुरू होगा !

और अगले दिन नन्हें जगदीप पहुंच गए स्टूडियो। इन्हे वहां इनकी माँ लेके गयी थी और सीन था की बच्चो का नाटक चल रहा है और दूसरे बच्चे उन्हें देख रहे है..उन्ही देखने वालों बच्चो में इन्हे बैठा दिया गया तभी स्टेज पर एक ऐसा डायलॉग आया जो कोई भी बच्चा नहीं बोल पा रहा था क्योंकि वो उर्दू मे था इधर जगदीप अच्छी उर्दू जानते थे उन्होंने अपने पास बैठे बच्चे से पूछा अगर मैं ये डायलॉग बोलू तो क्या होगा?

दूसरा बच्चा बोला ज्यादा पैसे मिलेंगे 3 की जगह 6 रूपये! ये सुन के जगदीप ने अपना हाथ उठा के कहा साहब मैं बोल सकता हूं ये डायलॉग। स्टेज वालों ने कहा अच्छा तो जरा बोलकर दिखाओ ! इन्होने वो डायलॉग बोला और तालियां बजना शुरू हो गयीं और वहीं से इनका फ़िल्मी केरियर बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरू हो गया… फ़िल्म थी बीआर चोपड़ा साहब की “अफसाना” जिसके डायरेक्टर थे यश चोपडा ! अफसाना और इसके बाद जगदीप साहब ने लगातार 35 सालों तक काम किया कभी कोई ब्रेक नहीं लिया ! बचपन से जवानी और जवानी से बुढ़ापे तक इन्होने दिलीप कुमार साहब के बचपन का भी रोल किया और सलमान खान के पिता का भी..!

इन्होंने अपने दौर के लगभग प्रत्येक कलाकार संग काम किया जिनमें दिलीप कुमार, धर्मेन्द्र, देवानंद, अमिताभ बच्चन और बाकी बीसियों दिग्गज कलाकारों के नाम आते हैं!
शोले फिल्म के सूरमा भोपाली कर किरदार आज भी दर्शकों को याद आता है!

बेशक…बहुत ही लम्बे समय तक इन्होने हमें हंसाया हमारा मनोरंजन किया..जिसके लिए हम इन्हे दिल से सलाम करते हैं…..!         संकलन :-NK sharma tct

Nk sharma tct reporte    rसंकलन :-NK sharma tct

 

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