प्रधानमन्त्री_जी_द्वारा_आप_पार्टी_का_नया_नामकरण_कर_नाम_आपदा_पार्टी_रखा_गया


5 जनवरी 2024–(#प्रधानमन्त्री_जी_द्वारा_आप_पार्टी_का_नया_नामकरण_कर_नाम_आपदा_पार्टी_रखा_गया)–

दिल्ली विधान सभा के चुनाव का बिगुल बज चुका है। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनाव के टाइम टेबल की औपचारिक घोषणा नही की है लेकिन दिल्ली की सत्ता के तीनो दावेदारो आप,भाजपा और कांग्रेस ने जोर-शोर से तैयारी शुरू कर दी है। सभी ने उम्मीदवारो के नाम फाइनल कर सार्वजानिक करने शुरू कर दिए है। इस बार भाजपा की ओर से स्वयं प्रधानमंत्री जी ने कमान संभालते हुए शुक्रवार को आप पार्टी पर हमला बोला और उसे देश की आपदा पार्टी बताया। उन्होने आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की शीशमहल और चुनाव मे झूठे वायदो को लेकर भी आलोचना की और दिल्ली के मतदाताओ से आप रूपी आपदा से दिल्ली को छुटकारा दिलाने का आह्वान किया। हालांकि मेरा ब्लॉग इस नये नामकरण पर कोई टिप्पणी करने मे सक्ष्म नही है, लेकिन प्रतिष्ठित अखबार मे छपे एक लेख मे बताया गया है कि केजरीवाल दिल्ली की जनता के साथ जो चुनावी वायदे कर रहे है वह पूरे करने असम्भव है और अगर पूरे कर भी दिए गए तो निश्चित तौर पर सरकार पर आर्थिक आपदा आ जाएगी। स्मरण रहे दिल्ली मे आम आदमी पार्टी सरकार बनने के बाद सभी महिलाओ को 2100 रूपए प्रतिमाह देने का वायदा कर रही है। आप सभी साठ वर्ष से ऊपर के नागरिको के मुफ़्त इलाज की बात कह रही है। अब केजरीवाल ने हिन्दु और सिख समुदाय के मतदाताओ को लुभावने के लिए मंदिरो के पुजारियों और गुरूद्वारों के ग्रंथियों को 18000 रूपए प्रतिमाह देने की घोषणा की है। काबिलेगौर है कि उन्होने पहले यह घोषणा की थी कि मौलानाओ को 18000 रूपए प्रतिमाह मिलगें। अखबार की रिपोर्ट कहती है कि कुछ समय देने के बाद यह राशि मौलानाओ को मिलनी बंद हो गई थी।
मेरी समझ मे सभी पार्टियों मे मुफ्तवाद पर सवार हो कर सत्तारूढ होने की होड़ लगी है और अभी तक केजरीवाल इस रेस मे दिल्ली मे अन्य पार्टियों को पछाड़ने मे सफल रहे है। हालांकि मुफ़्त वाली योजनाएं ज्यादा लम्बे समय तक नही चलती। इसके कारण सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और सरकार के आर्थिक आपदा मे घिरने का खतरा रहता है। मेरे विचार मे भाजपा जो कि दिल्ली मे प्रिंसिपल विरोध पक्ष है को मुफ्तवाद की दौड़ मे शामिल न हो कर एक वैकल्पिक विजन,प्रोग्राम और कल्याणकारी योजनाओ का पैकेज पेश करना चाहिए। इस पैकेज का लक्ष्य दिल्ली को विश्व की सर्वश्रेष्ठ राजधानी बनाना होना चाहिए। इसके लिए दिल्ली के मतदाताओं को विश्वास मे लेना होगा, अन्यथा एक बार फिर दिल्ली की जनता मुफ्तवाद के जाल मे फंस कर झांसे मे आ सकती है, फिर दिल्ली के आर्थिक आपदा के कगार पर जाने के बारे यही कहा जाएगा कि ” दिल्ली दूर नही है”