पाठकों के लेख एवं विचार

*पाठकों के लेख एवं प्रस्तुति :-मनमोहन सिंह की रचना*

बहुत व्यवहारिक हो गए हैं लोग,
हथेली पे जान क्यों रखें?
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जबतक कोई काम नहीं,
तब तक कलाम क्यों रखें?
जो दीवार के साए से भी रहता है दूर,
ऐसे पड़ोसी से सलाम क्यों रखें?
जिस पेड़ की जड़ में हो बांबी सांप की,
परिंदे उस पर अपना मुकाम क्यों रखें?
ले जा कर जो खाई में धकेल रहा हो,
ऐसे को हुकुमरान क्यों रखें?
बच्चों ने यह सोच पिता को निकाल दिया,
घर में टूटा समान क्यों रखें?
– मनमोहन सिंह

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