पाठकों के लेख एवं विचार

*वास्तविकता और धारणाओ में बहुत बडा अंतर होता है*

 

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Tct chief editor

अकसर भारत में हर बुराई की जड़ पश्चिमी सभ्यता को कहा जाता है , छोटी से छोटी बात हो या बडी से बडी तुलना पश्चिम के विकसित देशों से होने लगती है ।राजनीतिक स्तर पर या कूटनीतिक स्तर पर तो मत भेद लाजमी हैं क्योंकि हर देश की अपनी सीमाएं और प्राथमिकताएं होती है और देशों के बीच समझाते ले और दे के आधार पर होते है। लेकिन मेरा विषय यह नही है अपितु सामाजिक और आर्थिक है । अपने इस लंबे प्रवास के दौरान मेने कोई ऐसी बात या बुराई नही देखी जिसे हमारे देश मे कोसा जाता है । यहां आस्ट्रेलिया में समाज का बहुत बडा वर्ग श्रमिक ही है । चाहें वो निमार्ण से जुड़े हो , शॉपिंग मॉल्स में हो ,होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय में हो अधिकतर श्रमिक ही मिलेंगे । दूसरी बात यहां श्रमिक कुशल होते है और ट्रेडीज यानी प्लम्बर ,इलेक्ट्रीशियन , तकनीशियन सब कुशलता प्रमाण पत्र के साथ होते हैं किसके बिना कोई कार्य नहीं कर सकता । यहां तक की नाई धोबी कसाई , या फिर शेफ सब कुशलता प्रमाण पत्र के साथ और कुशलता प्रमाण पत्र मिलता है ट्रेनिंग और अनुभव प्राप्त करने के साथ । कोई भी दुकान कोई भी व्यवसाय बिना सरकार की मर्जी के नही किया जा सकता और नियमो के बाहर नही ।
दूसरी बात जो मुझे सब से हैरान जनक लगी 99 .9 प्रतिशत लोग साधरण कपड़ो में रहते हैं यहां तक कि बड़े बड़े शॉपिंग मॉल्स या बाजारों में लोग साधरण कपड़ो में होते हैं । अधिकत्र जॉगर में , जींस में या फिर निक्कर में। कोई फैशन नही । अकसर लोग परफ्यूम्स का इस्तेमाल करते हैं । निहायत ही मेहनती नारी हो या पुरुष बराबर मेहनत । नारियों को बहुत अधिकार हैं ताकि शौषण न हो और हर किसी को नियमो को मानना पड़ता है कानून बहुत सख्त हैं और कोई हस्तक्षेप नहीं । महिलाऐं अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक है और पुरुष सम्मान देने को बाध्य है ।कोई किसी भी नियम को तोड़ते हुए पकड़ा जाए तो कानूनन कार्यवाही को प्रधान मंत्री भी नही रोक सकता । लोग दोनो तरह का भोजन करते हैं मांसाहारी भी और शाकाहारी भी । किसी भी होटल रेस्टिरेंट या दुकान में आपको पिछले कल का खाना नही मिलेगा , जो आज बनाया गया हैं उसे आज ही खत्म करना है या फेंकना पड़ेगा । आप वासी कोई चीज़ ग्राहक को नही दे सकते ।हर घर हर व्यापारिक संस्थान में तीन तीन कूड़ा डालने के लिए बिन होते हैं एक में रबिश , एक में रीसायकल और एक में घास फूस । किसी को भी घास जलाने या कूड़ा जलाने की इजाजत नही है । कोई कबाड़ की दुकान नही ।बस गाडियां आती है अलग अलग बिन के लिए अलग अलग और कूड़े को ले जाती हैं । अधिकतर मकान भारत के मुकाबल छोटे हैं आंगन या मकान के पिछवाड़े खाली रखे जाते है जहां घास रहती है जब काटने की जरूरत हो तो हर घर में कटिंग मशीन होती है खुद ही काट कर बिन में डाल देते है जिसे निष्पादन के लिए सरकारी गाडी ले जाती है । लेकिन भारत में जो मिथ फैलाए जाते हैं वो यहां देखने को नही मिले । बाकी मैने क्या क्या समझा आगामी दिनों में लिखूंगा ।

Umesh Bali Tct

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