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*संपूर्ण स्वास्थ्य और संपूर्ण खुशी*golok express*

संपूर्ण स्वास्थ्य और संपूर्ण खुशी

प्रिय पाठको पिछले लेख में हमने चर्चा की थी कि भगवत गीता क्या है ,भगवत गीता को कैसे समझें |आज हम चर्चा करेंगे संपूर्ण स्वास्थ्य और संपूर्ण खुशी पर |

संपूर्ण स्वास्थ्य और संपूर्ण खुशी
आधुनिक दुनिया में लोग आमतौर पर समझते हैं कि धन-संपत्ति जोड़कर खुशी प्राप्त कर सकते हैं और इसीलिए सभी पैसे के पीछे भाग रहे हैं| हम पैसा कमाने के दुष्चक्र में पड़ जाते हैं और इसका उपयोग हम अपने इंद्रिय तृप्ति के लिए करते हैं| जिससे हमें कभी भी संतुष्टि नहीं मिलती और आखिरकार हमें एहसास होता है कि हम मृगतृष्णा के पीछे भाग रहे हैं और इन सब के पीछे भागते रहने से अंत में हमें जो पहाड़ मिलता है वह है तनाव, क्रोध चिंता डिप्रेशन और नकारात्मकता | और फिर एक दिन हमें अचानक एहसास होता है कि खुशी को खरीदा नहीं जा सकता| हम सभी असीमित खुशी की तीव्र इच्छा रखते हैं परंतु यह कैसे पाई जाए इसके पीछे के रहस्य को नहीं जानते हैं | गोलोक एक्सप्रेस ने संपूर्ण स्वास्थ्य और संपूर्ण खुशी नामक एक मॉडल मानवता के भले के लिए हमें दिया है| यह एक अनुभावात्मक मॉडल है और इसके उपयोग
से बहुत लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं संपूर्ण स्वास्थ्य के पांच अंक हैं और सभी अंगों में संतुलन बनाने से हम जीवन में संपूर्ण खुशी को अनुभव कर सकते हैंहैं
आध्यात्मिक /Spirtual स्वास्थ्य :-
Spirtual शब्द spirit शब्द से आया है जिसका अर्थ है आत्मा और यही हमारा आंतरिक अस्तित्व है | हम बाहर से जो देखते हैं वह शरीर है , लेकिन वास्तव में हम एक आत्मा हैं एक ऊर्जा जो सुपर सोल यानी प्रभु का ही एक हिस्सा है | यह ऊर्जा प्रभु का एक हिस्सा होने के नाते अविनाशी है | यह आत्मा अमर है, यह हमेशा से रही है और हमेशा रहेगी |
जीवन में शांत रहने और भीतर से शांति अनुभव करने के लिए आत्मा स्वस्थ होनी चाहिए और यह केवल तभी संभव है जब यह अपने मूल यानी सुपर सोल – परमात्मा से जुड़ी हो |
इस संबंध को भक्ति की विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बनाए रखा जा सकता है जैसे कि सत्संग साधना और सेवा और यह गतिविधियां हमें यानी आत्मा को चार्ज रखने में मदद करती हैं |
जैसे कि शास्त्र पढ़ना, जप करना, सत्संग करना , यूट्यूब पर आध्यात्मिक वीडियो सुनना, भजन सुनना , धार्मिक नाटक देखना , मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च जाना और यहां तक की छुट्टियों का आनंद लेने के लिए तीर्थ यात्रा भी जा सकते हैं |
आध्यात्मिक साधना में विविधता को बनाए रखने से हमारी अध्यात्मिक स्वास्थ्य का निर्माण करने में हमें आसानी होती है |
प्रिय पाठको अगले लेख में हम संपूर्ण स्वास्थ्य के दूसरे अंग यानी मानसिक स्वास्थ्य के बारे में चर्चा करेंगे कि मानसिक स्वास्थ्य क्या होता है, आध्यात्मिक स्वास्थ्य हमारी मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में कैसे सहयोग करता है?
अगर आप भी हमारी तरह घर बैठे बैठे सत्संग श्रवण कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं तो यूट्यूब पर गोलोक एक्सप्रेस नामक चैनल को सब्सक्राइब कीजिए | आपको हर सुबह 5:30 से 6:30 am IST लाइव सत्संग मिलेगा जिसमें सोमवार को महान कवियों द्वारा रचित दोहों की व्याख्या की जाती है , मंगलवार को रामायण की तथा बुधवार, वीरवार और शुक्रवार को श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करवाया जाता है | आप फेसबुक पर भी गोलोक एक्सप्रेस नामक पेज पर जाकर सत्संग का लाभ उठा सकते हैं तथा 7018026821 पर संपर्क करके भी अपने वक्त और सुविधा अनुसार घर बैठे बैठे श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन कर सकते हैं |
गोलोक एक्सप्रेस में आइए दुख दर्द भूल जाइए एबीसीडी की भक्ति में लीन होकर नित्यानंद पाइए|

और अधिक जानकारी के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें..
https://youtu.be/71HKCrws2xg

 

 

 

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