*सुप्रीम_कोर्ट_ने_विपक्ष_की_याचिकाएं_की_खारिज*MN SOFAT Ex Minister HP*



07 अप्रैल 2023- (#सुप्रीम_कोर्ट_ने_विपक्ष_की_याचिकाएं_की_खारिज) –
कांग्रेस के नेतृत्व मे 14 विपक्षी दलों ने याचिकाएं दायर कर विपक्ष के खिलाफ केन्द्रीय जांच एजैसियों का मनमाने ढंग से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्थापित नियम को एक बार फिर से परिभाषित करते हुए कहा है कि नेताओं के लिए अलग नियम नहीं बनाए जा सकते है। कोर्ट की अनिच्छा को भांपते हुए राजनीतिक दलों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने याचिकाएं वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिका को वापस मानते हुए खारीज कर दिया। मेरी समझ मे सारी याचिकाएं गलत तर्क पर दायर की गई थी। विपक्ष का यह तर्क कि मोदी सरकार बनने के बाद ईडी और सी.बी.आई के केसो मे 600 प्रतिशत बढौतरी हुई है और अधिकांश केस विपक्षी नेताओं के खिलाफ बनाए गए है। यह तर्क सुप्रीम कोर्ट से राहत लेने के लिये काफी नहीं माने जा सकते है। विपक्ष के वकील ने याचिका वापस लेने से पहले गिरफ्तारी से पहले और गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से कुछ दिशा-निर्देश तय करने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने कहा जब नेता आम नागरिक के बराबर है तो नेताओं के लिए अलग नियम नहीं बनाए जा सकते है।
मेरे विचार मे सुप्रीम कोर्ट का फैसला विपक्ष को बड़ा झटका है। वह सरकार के पक्षपात को लेकर तो कोर्ट जाते है लेकिन अपने को कोर्ट मे निर्दोष साबित करने के लिए कोर्ट नहीं जाते। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच एजैसियां आपके साथ गलत करती है तो हम आम आदमी के केस की भांति आपका केस गुण-दोष के आधार पर सुनने के लिए उपलब्ध है। हमारी गप्प गोष्टी के सबसे वरिष्ठ सदस्य और कांग्रेस से सहानुभूति रखने वाले सज्जन उस दिन बहुत खफा थे जिस दिन सी.बी.आई सोनिया गांधी से अपने दफ्तर मे नेशनल हेराल्ड के बारे मे पूछताछ कर रही थी। जब मैने उनसे पूछा इसमे क्या गलत है तो उनका तर्क था कि वह देश के प्रधानमंत्री की विधवा है इसलिए उन्हे जांच एजंसी को दफ्तर मे नहीं बुलाना चाहिए था। कांग्रेसजनो की ऐसी मानसिकता है का ही प्रतिबिंब कोर्ट मे दायर की गई याचिकाएं है। विपक्ष को कोर्ट जा कर अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करने चाहिए अन्यथा कच्चे पैर अदालत से राहत नहीं मिल सकेगी और जगहंसाई अलग से होगी।

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।