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*Tricity times morning news bulletin 13 May 2023*

 

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Tricity times morning news bulletin 13 May 2023

ट्राई सिटी टाइम्स प्रातः कालीन समाचार
आज 13 मई, 2023 शनिवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है |ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अष्टमी, अनला संवत्सर विक्रम संवत 2080, शक संवत शोभकृत 1945, बैशाख

संकलन : नवल किशोर शर्मा

1) कर्नाटक का 38 साल का ट्रेंड तोड़ पाएगी बीजेपी या कांग्रेस करेगी सत्ता में वापसी, नतीजे अभी कुछ देर में

2) कर्नाटक-उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव और उपचुनावों के नतीजे भी आज,

3) हिंद महासागर सम्मेलन: जयशंकर का चीन पर निशाना, बोले- भरोसे को कम करते हैं समझौतों का उल्लंघन करने वाले देश

4) चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने जा रहा है. प्रताप केसरी, वहीं एचडी कुमारस्वामी से हो रही बात की चर्चा पर कहा कि हमने उनसे संपर्क नहीं किया है. उन्होंने कहा, ”हमें प्रचंड बहुमत मिल रहा है. वह परिणाम आने पर तय करेंगे कि आगे क्या करना है

5) जीत से कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी, तो भाजपा के लिए खुलेंगे दक्षिण के नए द्वार

6) सुप्रीम कोर्ट में अब 24 घंटे में दाखिल हो सकेंगे मामले, प्रताप केसरी, ई-फाइलिंग 2.0 सेवा का आगाज

7) कांग्रेस को कर्नाटक के नतीजों से गहलोत-पायलट जंग में सुलह का रास्ता निकलने की उम्मीद, नए सिरे से शुरू होगी पहल

8) आपसी दुश्मनी से करें किनारा,इसमें कर्नाटक फार्मूले का उदाहरण देते हुए राजस्थान के दोनों पार्टी दिग्गजों को आपसी दुश्मनी को किनारे रख राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करने के लिए समझाने का प्रयास भी होगा

9) चुनाव पर पायलट बोले- विपक्ष में अध्यक्ष चेहरा होता है, गहलोत पर तंज- सत्ता में सीएम लीड करता है, प्रताप केसरी, हम हमेशा सरकार में रहते हुए हारे

10) गहलोत के 2 मंत्रियों के बीच विवाद, खाचरियावास बोले- धारीवाल को पानी पिलाने वाला बयान नहीं देना चाहिए था, कल ही मंत्री धारीवाल ने कहा था, की गहलोत ने अच्छे- अच्छे को पानी पिलाया है, खाचरियावास बोले पायलट का गुनाह नहीं

11) द केरला स्टोरी पर सुप्रीम कोर्ट का बंगाल-तमिलनाडु को नोटिस, कहा- पूरे देश में फिल्म चल रही, आपको क्या दिक्कत है

12) बजरंग बली बीजेपी से नाराज, कर्नाटक चुनाव में लगेगा तगड़ा झटका;आरजेडी का दावा

13) खुदरा महंगाई की मार से राहत, अप्रैल में 18 महीने के निचले स्तर 4.70 फीसदी पर

14) IPL 2023: राशिद का ऑलराउंड प्रदर्शन गया बेकार, मुंबई ने सूर्यकुमार के शतक की मदद से GT को 27 रन से हराया.

Tct विस्तृत

1) कर्नाटक की 224 सीटों का रूझान आया सामने

रूझानो में कांग्रेस को मिला बहुमत

बीजेपी- 78, कांग्रेस- 128, JDS- 17
गवर्नर-स्पीकर घिरे, उद्धव को भी राहत नहीं, मामला बड़ी बेंच को, समझें महाराष्ट्र पर सुप्रीम आदेश के मायने

महाराष्ट्र में एक साल से चल रहे राजनीतिक घमासान पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बनेंगे रहेंगे, लेकिन मामला बड़ी बेंच को भेज दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर और स्पीकर की भूमिका पर सवाल खड़े करके भविष्य के लिए बड़े संकेत दिए हैं. शिंदे-उद्धव मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या होगा असर?

नई दिल्ली,
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने गुरुवार को उद्धव ठाकरे गुट और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की विभिन्न याचिकाओं को बड़ी बेंच को भेज दिया. इसके साथ महाराष्ट्र में एक साल से चल रही राजनीतिक उठापटक पर फिलहाल कुछ समय के लिए ब्रेक लग गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर और स्पीकर पर टिप्पणी करते हुए उनकी भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया, जिसके चलते उनकी सरकार को बहाल नहीं कर सकते हैं. 

शिंदे-उद्धव के मामले में सुप्रीम कोर्ट से क्या अपील की गई थी ?

बता दें कि जून 2022 में एकनाथ शिंदे और शिवसेना के 15 विधायकों ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी. इसके बाद शिंदे समेत शिवसेना के 16 विधायकों ने बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना ली थी. राज्यपाल ने शिंदे-बीजेपी गठबंधन सरकार को मान्यता देकर शपथ दिला दी थी.
उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मांग की थी कि शिवसेना के 16 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द की जाए और राज्यपाल का जून 2022 का आदेश रद्द किया जाए, जिसमें उद्धव से सदन में बहुमत साबित करने को कहा गया.

उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एमवीए सरकार बहाल की जाए जैसा कोर्ट ने 2016 में अरुणाचल प्रदेश में नबाम तुकी सरकार की बहाली के ऑर्डर में किया था. 
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने उद्धव-शिंदे मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि 2016 का नबाम रेबिया मामले में कहा गया था कि स्पीकर को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती है, जब उनके निष्कासन का प्रस्ताव लंबित है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में एक बड़ी पीठ के संदर्भ की जरूरत है. 
सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर और स्पीकर की भूमिका पर सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट को गलत भी ठहराया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोगावाले (शिंदे समूह) को शिवसेना पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्त करने का स्पीकर का फैसला अवैध था. 
कोर्ट ने कहा कि व्हिप को पार्टी से अलग करना ठीक नहीं है. पार्टी में असंतोष के आधार पर फ्लोर टेस्ट नहीं होना चाहिए. अब स्पीकर को शिवसेना के 16 बागी विधायकों पर जल्द फैसला करना चाहिए. साथ ही उद्धव ठाकरे सरकार को बहाल करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है और कहा कि उद्धव ठाकरे इस्तीफा न देते तो उन्हें बहाल किया जा सकता है. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसला का क्या असर?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एकनाथ शिंदे सरकार को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है. शिंदे सरकार चलती रहेगी और मामले में अब सात जजों की संवैधानिक पीठ सुनवाई करेगी.  

सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से स्पीकर को विधायकों की अयोग्यता को लेने के लिए कहा है, उससे साफ है कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को इस मामले पर अब फैसला लेना है. 
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह भी साफ हो गया है कि उद्धव ठाकरे सरकार बहाल नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे फ्लोर टेस्ट का सामना करने पहले इस्तीफा दे दिए थे, जिसे कोर्ट रद्द तो नहीं कर सकता है. हम पुरानी सरकार को बहाल नहीं कर सकते हैं. 

फैसले के बाद आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से उद्धव-शिंदे मामले को बड़ी बेंच को भेजा है, उससे साफ है कि देश की सबसे बड़ी अदालत इस तरह मामले के लिए एक ठोस फैसला लेना चाहती है, ताकि दूसरे राज्यों में फिर इस तरह के मामले सामने न आ सकें. कोर्ट ने इसलिए 2016 में अरुणाचल प्रदेश में नबाम तुकी सरकार के मामले के फैसले पर गहनता से विचार-विमर्श करना चाहता है. 

सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर और स्पीकर की भूमिका को लेकर जिस तरह की टिप्पणी की है, उससे भी एक बात साफ हो गई है कि दूसरे राज्यों के राज्यपाल और स्पीकर इस तरह के कदम उठाने से हिचकिचाएगें. साथ ही कोर्ट ने जिस तरह से उद्धव ठाकरे के इस्तीफा पर टिप्पणी की है, उससे भी जाहिर होता है कि इस तरह के मामले दूसरे राज्यों में आएंगे तो कोई भी मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा देने से कतराएंगे..

2) कर्नाटक चुनाव मतगणना : शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के पार निकलती दिख रही, हर पल बदल रहा आंकड़ा; दोपहर तक साफ होगी स्थिति..!!

बेंगलुरु:- कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को जारी मतगणना के शुरुआती रुझानों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कांग्रेस से मामूली अंतर से आगे है.

कर्नाटक के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के पार निकलती दिख रही है.

कांग्रेस पार्टी 116 सीटों पर आगे चल रही है. बीजेपी को 85 सीटों पर बढ़त है. कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को मतदान हुआ था.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना जारी है. इस बार चुनाव प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है, यह शनिवार दोपहर तक साफ हो जाएगा. इस चुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता बसवराज बोम्मई, कांग्रेस नेता सिद्धरमैया और डी. के. शिवकुमार तथा जद (एस) के एच. डी. कुमारस्वामी सहित कई अन्य बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है.

कर्नाटक की सभी 224 सीटों पर मतगणना शुरू, रणनीति बनाने में जुटी भाजपा-कांग्रेस

मतगणना राज्य भर के 36 केंद्रों में सुबह आठ बजे शुरू हुई और निर्वाचन अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि राज्य के भावी राजनीतिक परिदृश्य की तस्वीर दोपहर तक स्पष्ट हो जाएगी. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए राज्य भर में विशेषकर मतगणना केंद्रों के अंदर और आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. राज्य में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को चुनाव में 73.19 प्रतिशत का ‘‘रिकॉर्ड’’ मतदान दर्ज किया गया था.

3) कर्नाटक राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना का भी संकेत दिया:

ज्यादातर ‘एग्जिट पोल’ में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़े मुकाबले का पूर्वानुमान जताया गया है, हालांकि दोनों दलों के नेताओं में नतीजों को लेकर ‘‘बेचैनी’’ दिख रही है, जबकि जद (एस) को त्रिशंकु जनादेश की उम्मीद है ताकि उसे सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने का मौका मिल सके. अधिकांश सर्वेक्षणकर्ताओं ने सत्तारूढ़ भाजपा पर कांग्रेस को बढ़त दी है. हालांकि कुछ ने राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना का भी संकेत दिया है.

पार्टी ‘मोदी प्रभाव’ पर भरोसा जता रही:

राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य की सत्ता में क्रमिक बदलाव की 38 साल पुरानी परंपरा तोड़ने की उम्मीद में है. इसके लिए पार्टी ‘मोदी प्रभाव’ पर भरोसा जता रही है. वहीं, कांग्रेस भी इस चुनाव में जीत हासिल करना चाहती है ताकि वह इसका इस्तेमाल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए कर सके. यह भी देखा जाना बाकी है कि त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में क्या सरकार बनाने की कुंजी पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जद (एस) के पास होगी? दिल्ली और पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इसके अलावा कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में कुछ छोटे दल भी मैदान में हैं!

4) कर्नाटक नतीजों का वीडियो एनालिसिस : सुबह कांग्रेस की, मगर सरकार शाम को तय होगी; बड़ी बात- पिछली बार 122 सीटों पर जीत का मार्जिन 10% से कम

कर्नाटक की काउंटिंग जारी है। सीटें 224 हैं। अभी बस रुझान है। सरकार कभी कांग्रेस की, तो कभी भाजपा की बन-बिगड़ रही है। ये हालत दोपहर बाद तक बनी रह सकती है। लेकिन शुरुआती हिसाब-किताब के चुनावी मायनों को समझने की कोशिश करते हैं। साथ में ये भी देखेंगे कि अगर मुकाबला करीबी रहा तो क्या-क्या हो सकता है। ये बात इसलिए, क्योंकि पिछली बार, यानी 2018 में 224 में से 122 सीटों पर जीत का मार्जिन 10% से भी कम था।

5) BJP को बड़ा झटका:–

येदियुरप्पा के ग्रह जिले में bjp 7 में से 5 सीटों पर पीछे

6) राजस्थान : पदयात्रा से कांग्रेस को क्या संदेश देना चाहते हैं सचिन पायलट, जानिए उनका फ्यूचर प्लान!

सचिन पायलट की पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं. पायलट इस यात्रा में मिल रहे जनसमर्थन के जरिए कांग्रेस आलाकमान को अपनी ताकत और लोकप्रियता का अहसास कराना चाहते हैं. ताकि पार्टी में उनकी भूमिका तय हो. पायलट की पहली प्राथमिकता कांग्रेस में बने रहने की है. अगर कांग्रेस उनकी मांगों पर गौर नहीं करती तो वे अपनी अलग पार्टी भी बना सकते हैं.

जयपुर,
सचिन पायलट ने अजमेर से 5 दिन की अपनी पदयात्रा पर हैं. 41 डिग्री तापमान के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनके साथ यात्रा पर हैं. यात्रा की शुरुआत करते हुए पायलट ने भ्रष्टाचार के मामले में वसुंधरा राजे सरकार पर जमकर निशाना साधा. इसके बाद उन्होंने सीएम अशोक गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, मेरे राजनीतिक जीवन में एक फूटी कौड़ी का मुझपर आरोप कोई नहीं लगा सकता. इतना ही नहीं पेपर लीक के मुद्दे पर उन्होंने अपनी ही सरकार पर हमला बोला. आइए जानते हैं पायलट का क्या प्लान है और इस यात्रा से क्या संदेश देना चाहते हैं?.

दरअसल, कहा जा रहा है कि पायलट इस यात्रा में मिल रहे जनसमर्थन के जरिए कांग्रेस आलाकमान को अपनी ताकत और लोकप्रियता का अहसास कराना चाहते हैं. ताकि पार्टी में उनकी भूमिका तय हो. पायलट की पहली प्राथमिकता कांग्रेस में बने रहने की है. उन्होंने उम्मीद है कि उनकी यात्रा को देखते हुए जल्द पार्टी आलाकमान हस्तक्षेप करेगा. इतना ही नहीं पायलट ये भी चाहते हैं कि अशोक गहलोत जिस तरह से हर मंच से उनपर सरकार गिराने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, ये सिलसिला रोका जाए. 

पायलट का क्या है फ्यूचर प्लान?
11 जून को कुछ बड़ा करने वाले हैं? देखें इस सवाल पर क्या बोले पायलट

पायलट अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. वे उनके प्रति पार्टी आलाकमान का रुख देखना चाहते हैं. अगर पार्टी ने आलाकमान हस्तक्षेप नहीं करता, तो पायलट नई पार्टी बनाएंगे और इस चुनाव में कांग्रेस को कड़ी टक्कर देंगे. अगर 2023 में हंग असेंबली बनती है, तो वे किंग मेकर की भूमिका में आकर बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं. हालांकि, यह इतना आसान नहीं है, क्योंकि वसुंधरा राजे की मौजूदगी में ऐसा संभव नहीं है. इस मुद्दे पर बीजेपी भी दो फाड़ हो सकती है. 
 
पायलट की यात्रा में उमड़ पड़ी भीड़
पायलट की यात्रा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं. उन्हें जनसमर्थन मिलता दिख रहा है. पायलट पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर इस पदयात्रा को कर रहे हैं, ऐसे में युवा सबसे ज्यादा उनकी यात्रा में शामिल हो रहा है. सचिन पायलट ने एक छोटे बच्चे के साथ मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए लिखा, 
”इन आंखों के सपने हजार है. दिल में हैं अनेकों उम्मीदें, 
इनके सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए, हम तत्पर है, तैयार हैं”

पायलट की सभाओं में क्यों उमड़ रही भीड़.

पेपरलीक, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता में गहलोत सरकार के प्रति नाराजगी है, खासकर के युवा वर्ग में. पायलट युवा नेता हैं, सधी हुई बयानबाजी करते हैं, लगातार अपनी ही सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते रहे हैं. ऐसे में लोगों को उनसे उम्मीदें हैं. इतना ही नहीं करीब 25 विधायक और मंत्री भी उनके समर्थन में हैं. पार्टी के वे नेता भी पायलट के साथ हैं, जिन्हें गहलोत द्वारा किनारे किया गया है.

पायलट की छवि ईमानदार नेता के तौर पर रही है. उनके पास बड़ा जातीय आधार है. उन्हें मीणा-जाट जैसी जातियों का भरपूर समर्थन मिल रहा है. इतना ही नहीं पिता रजेश पायलट की विरासत और नाम भी उनके साथ है. उपमुख्यमंत्री के रूप में भी उनके काम काज की तारीफ होती रही है. 

पायलट की नाराजगी से कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
अगर पायलट कांग्रेस छोड़ते हैं, तो भले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए अच्छी खबर हो, लेकिन कांग्रेस के लिए यह शुभ खबर नहीं होगी. सचिन पायलट राजस्थान के कद्दावर नेता माने जाते हैं. अगर वे पार्टी से बाहर जाते हैं, तो उन्हें मिलने वाली सहानुभूति से कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है. 

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट को कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की लिस्ट में नहीं रखा था. तब कहा जा रहा था कि कांग्रेस को अहसास हो गया है कि सचिन पायलट किसी ऐजेंसी के संपर्क में हैं. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या सचिन पायलट वाकई कांग्रेस छोड़ना चाहते हैं या फिर उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा. 

अपनी यात्रा से पहले पायलट ने वीडियो जारी किया. इसमें उनकी लाचारी साफ देखी जा सकती है. इसमें वे लिखते हैं, मैं यहां क्या करूं ? कब तक बैठे बैठे सिविलाइंस के अपने आवास ने टीवी देखता रहूं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहां -कहां जा रहे हैं और क्या क्या बोल रहे हैं ? केोई सुननेवाला नहीं है तो मैं कब तक अपनी राजनैतिक हत्या करवाउं.

पायलट की यात्रा से दिक्कत नहीं होनी चाहिए- खाचरियावास
राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, हमारे नेता राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. बीजेपी जो पाप कर रही, वो राहुल गांधी ने उठाया. अगर अब सचिन पायलट भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे हैं, तो किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. पार्टी में सबको अधिकार है. .

Naval kishore tct :लेखक एवं संकलनकर्ता

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