Editorial

*Editorial: बेसहारा पशुओं से कब मिलेगी निजात*

*Editorial: बेसहारा पशुओं से कब मिलेगी निजात*

यह है पालमपुर का बुटेल चौक।


इस चौक पर अक्सर बेसहारा पशुओं की भरमार दिखाई देती है कई बार तो इतने पशु इकट्ठा हो जाते हैं कि गाड़ियों का तो छोड़िए इंसानों का चलना भी दूभर हो जाता है ।पूरी सड़क ब्लॉक हो जाती हैं ।
चित्रों में आप देख रहे हैं कि यहां पर कितने सारे जानवर के इकठ्ठे हो गए हैं।
सुबह सुबह का समय है स्कूल के बच्चे स्कूल जाने के लिए निकले हुए हैं परंतु इन हमारा पशुओं की वजह से वे कभी भी किसी की भी बच्चे जान ले सकते हैं ।
यहां से लोग सुबह-सुबह बहुत सैर के लिए निकलते हैं जिम में बुजुर्ग और महिलाएं भी होती हैं। जवान लोग तो भाग कर अपनी जान बचा लेंगे लेकिन बच्चे बूढ़े और महिलाएं कैसे इन पशुओं के हिंसक होने पर अपनी जान बचा पाएंगे यह ईश्वर ही जानता है।

सरकार ना जाने कब चेतेगी। सबसे बड़ी बातयह है ,कि समझ नहीं आता है कि पालमपुर के आसपास के लगभग 2 किलोमीटर में अगर सभी पशुओं की गिनती की जाए तो भी इतनी संख्या नहीं होगी जितनी पालमपुर में इन बेसहारा पशुओं की इस वक्त है। क्योंकि 2 किलोमीटर क्षेत्र का शहरीकरण हो चुका है और यहां पर पशु किसी ने भी नहीं पाले हुए हैं ,फिर यह इतने सारे पशु पालमपुर में कहां से आते हैं ?
यह एक सोचनीय विषय है .

पालमपुर प्रशासन को चाहिए कि वह इस विषय में पता करें कि वे कौन लोग हैं जो गांव से इन पशुओं को भरकर पालमपुर के चौक चौराहों पर छोड़ जा रहे हैं जिससे वाहनों की आवाजाही में रुकावट आती है, इनकी वजह से एक्सीडेंट होते हैं ,तथा अभी हाल ही में दो आदमियों की जान इन बेसहारा पशुओं के कारण हुई है.

 

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