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*पालमपुर सिविल हॉस्पिटल मे पड़ोसी राज्य से भी आ रहे हैं मरीज!*

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पालमपुर सिविल हॉस्पिटल मे पड़ोसी राज्य से भी आ रहे हैं मरीज!

वैसे तो पालमपुर हॉस्पिटल से मरीज हो या तीमारदार बहुत खुश नजर नहीं आते, परंतु कुछ ऐसे भी मौके आते हैं जब सिविल हॉस्पिटल पालमपुर में बाहरी राज्यों के मरीज भी यहां पर हॉस्पिटल के इंफ्रास्ट्रक्चर को देखकर नहीं बल्कि डॉक्टरों के एक्सपीरियंस और क्रेडिबिलिटी को देखकर यहां का रुख करते हैं। यहां पड़ोसी जिलों से भी कुछ विशेषज्ञों के पास मरीज आते हैं परंतु आज एक ऐसी मरीज मिली जो होशियारपुर से चलकर पालमपुर आई और अपना ट्रीटमेंट करवा कर/ लिखवा कर वापिस होशियारपुर चली गयीं।
जी हां श्रीमती प्रेमलता को हृदय रोग है और वह पिछले कई वर्षों से इस रोग से ग्रसित हैं उन्होंने पीजीआई मे भी दिखाया और वहां पर उन्हे कोई खास फर्क नहीं पड़ा ।आज से 7- 8 साल पहले उन्होंने टांडा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर उमेश कश्यप को दिखाया था उनकी दवाइयों से उन्हें काफी फर्क पड़ा था। इसके पश्चात वे कई अन्य बड़े हॉस्पिटल में दिखाते रहे परंतु कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा। अंततः उन्होंने पुरानी पर्ची निकालकर टांडा मेडिकल में फोन किया कि क्या डॉक्टर उमेश कश्यप उपलब्ध हैं तो वहां से जवाब आया कि डॉक्टर उमेश कश्यप पालमपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने अपने पुत्र के साथ तुरंत पालमपुर का रुख किया और यहां पर आकर डॉ उमेश कश्यप को दिखाया। उनकी जो पहले की दवाइयां थी उसमें से बहुत सी दवाइयों को उनकी आवश्यकता अनुसार फिर से लिखा गया ।
मरीज ने बताया कि पहले भी उन्हें डॉक्टर उमेश कश्यप की दवाइयों से काफी फर्क पड़ा था और इसीलिए वह होशियारपुर से चलकर यहां पालमपुर में डॉक्टर को दिखाने आयीं हैं। उनके पुत्र ने कहा कि होशियारपुर से जालंधर लुधियाना और अमृतसर बहुत नजदीक हैं और यह शहद मेडिकल हब है और चंडीगढ़ भी कोई खास दूर नहीं परंतु उन्हें इन डॉक्टर पर विश्वास था इसलिए वह इतनी दूर चल कर आए हैं और पहले भी इनके इलाज से फर्क पड़ा था और अब भी उनकी ऐसी ही उम्मीद है।
डॉ कश्यप ने बताया कि इसी तरह से एक महिला मरीज थी जिसका नाम चम्पा देवी है और उन्हें किसी बड़े हॉस्पिटल ने पेसमेकर डलवाने को कहा था परंतु आर्थिक तंगी तथा ऑपरेशन के डर से वे ऐसा ना कर सकी अंततः उन्होंने डॉ कश्यप को दिखाया और रेगुलर मेडिसन और उपचार से उनका EF सुधर गया.
जबकि उन्हें जल्दी से जल्दी पेसमेकर डालने को कहा गया था

इसी तरह से नंगल से उनके पास एक मरीज आई जिनका नाम निर्मला देवी है और उन्होंने भी किसी बड़े हॉस्पिटल और पीजीआई में दिखाया था । उन्हें कहा गया था कि आपको Angio plus stenting की आवश्यकता पड़ेगी हालांकि इन महिला का बेटा नरेश कुमार पंजाब के पूर्व हेल्थ मिनिस्टर का PA था। लेकिन सर्जरी डर के मारे उन्होंने यह प्रोसीजर नहीं करवाया था उन्हें भी किसी मरीज ने डॉक्टर उमेश का रेफरेंस दिया और किसी अन्य के माध्यम से डॉ उमेश के बारे में पता चला तो वह नंगल से पालमपुर डॉक्टर उमेश कश्यप को दिखाने के लिए आए और 2019 से लेकर आजतक अपना इलाज करवा रही हैं।अब वह बिलकुल स्वस्थ है।

डॉक्टर कश्यप ने बताया कि इसी तरह से लुधियाना का एक मरीज क्योंकि उक्त चम्पा जी की रिश्तेदार है उनके पास आते हैं तथा वह भी चंडीगढ़ के बड़े सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवा चुकी हैं उन्हें वाल्व डालने के लिए कहा गया था यह मरीज आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं थे कि वाल्व बदलवा सकें क्योंकि वाल्व बदलवाने का खर्च चार लाख के करीब आना था इसलिये डॉ कश्यप ने कहा कि कुछ दिन इलाज करके देखते हैं फिर सोचते हैं कि हार्ट वाल्व बदलवाना है या नहीं। आज के दिन में उनकी स्थिति भी स्थिर है और फिलहाल हार्ट वाल्व डालने की कोई आवश्यकता नहीं रही ।

इसी तरह से पंचरुखी मे कार्यरत एक व्यक्ति है जिनकी पत्नी चंडीगढ़ के बड़े सरकारी हॉस्पिटल व नामी गिरामी प्राइवेट हॉस्पिटल और अन्य 2 बड़े शहरों हॉस्पिटलों में हृदय रोग का इलाज करवा चुकी थी और उन्हें केवल यही बताया गया था कि अब उनकी सेवा कीजिए। उनके पति डॉ उमेश कश्यप को जानते थे इसलिए वह डॉक्टर उमेश कश्यप के पास पालमपुर ले कर आए और उनके इलाज से अब वह महिला एकदम स्वस्थ और तंदुरुस्त फील कर रही है।

डॉ उमेश कश्यप ने बताया कि उनके पास मंडी हमीरपुर किन्नौर कुल्लू और चंबा के मरीज अक्सर आते हैं तथा अपना इलाज करवा कर खुद को संतुष्ट पाते हैं ।
उन्होंने बताया कि यदि मरीज बिना किसी महंगे इलाज के दवाइयों से और परहेज से ठीक हो जाए तो इससे बड़ी खुशी की बात उनके लिए कोई नहीं होती। क्योंकि मरीजों की खुशी में ही डॉक्टर्स की खुशी होती है और मरीज की दुआएं उनके लिए सबसे बड़ा अवार्ड होती है ।
यदि मरीज आप के इलाज से संतुष्ट है उन्हें फर्क पड़ रहा है वे खुद को सहज महसूस कर रहै है तो इससे बड़ा उन्हें कोई और अवार्ड नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा के हर डॉक्टर की यही इच्छा होती है कि उनके इलाज से मरीज बिना किसी महंगे टेस्ट के जल्दी से जल्दी स्वस्थ हो जाए और वह सहज महसूस करें ।
सभी डॉक्टर को इस स्थिति से खुशी मिलती है और वे दुगने जोश के साथ कार्य में जुट जाते हैं।

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