editorial:- *जंगली मुर्गा के विवाद में जनता के पैसे का दुरुपयोग: असली मुद्दों पर कब होगा ध्यान?*
देश के कई हिस्सों में जनता रोजमर्रा की गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन राजनीतिक बहसें और विवाद जंगली मुर्गी जैसे तुच्छ मुद्दों पर केंद्रित हैं।


जंगली मुर्गा के विवाद में जनता के पैसे का दुरुपयोग: असली मुद्दों पर कब होगा ध्यान?

देश में जहां एक ओर बेरोजगारी, अपराध, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बहसें और विवाद तुच्छ विषयों पर केंद्रित होकर जनता के पैसे और समय का दुरुपयोग कर रहे हैं। हाल ही में एक जंगली मुर्गी से जुड़े विवाद को लेकर हो रही चर्चाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई हमारी प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं।
आज देश में हर रोज कहीं न कहीं महिलाओं के साथ बलात्कार और हत्या जैसी घटनाएं हो रही हैं। अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। वहीं, अस्पतालों में लापरवाही के कारण लोगों की मौत आम होती जा रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में गरीब और मध्यम वर्ग की जिंदगी दांव पर लगी है।
इसके अलावा, देश में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। पढ़े-लिखे युवा, इंजीनियर और डॉक्टर, जिन्हें देश का भविष्य कहा जाता है, आज मामूली नौकरियों और दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हैं। बेरोजगारी के चलते कई लोग नशे की लत में पड़ रहे हैं।
देश के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे की हालत इतनी खराब है कि सड़कों पर चलते-चलते लोग बीमार हो जाते हैं। खस्ताहाल सड़कों के कारण होने वाले हादसे न सिर्फ लोगों की जान ले रहे हैं, बल्कि उनके परिवारों को भी आर्थिक और मानसिक संकट में डाल रहे हैं।
इन गंभीर मुद्दों के बीच, तुच्छ विषयों पर होने वाली बहसें न केवल संसाधनों का दुरुपयोग हैं, बल्कि यह दर्शाती हैं कि हमारी राजनीति किस हद तक असंवेदनशील हो चुकी है। जनता के पैसों और समय का सदुपयोग करके असली समस्याओं का समाधान करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। देश की राजनीति को अब उन विषयों पर ध्यान देना चाहिए, जो वास्तव में जनता के जीवन को प्रभावित करते हैं। बेहतर होता है यदि विपक्ष की पार्टी प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को विधानसभा में घेरती और उसे निरुत्तर करती।