*Editorial;- महेंद्र नाथ सोफत:-फर्जी_जन्म_प्रमाणपत्र_मामले_मे_आजम_परिवार_को_सात_साल_की_सजा*


20 अक्तूबर 2023- (#फर्जी_जन्म_प्रमाणपत्र_मामले_मे_आजम_परिवार_को_सात_साल_की_सजा)-

आजम खान उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के बड़े नेता है। उनके बड़े कद का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता कि वह उत्तर प्रदेश की रामपुर विधान सभा से दस बार विधायक रहे, एक बार सासंद रहे और वह समाजवादी सरकार मे वरिष्ठ मंत्री थे। मुलायम सिंह और अखिलेश के मुख्यमंत्री काल मे वह उत्तर प्रदेश के बेताज बादशाह थे। वह अपने को कानून से भी ऊपर समझते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वह अपने सत्तारूढ़ काल मे तत्कालीन मुख्यमंत्री के बराबर प्रभाव रखते थे। कहा जाता है उस समय उनकी अपने क्षेत्र मे तूती बोलती थी। समाजवादी पार्टी के इस संस्थापक सदस्य के बुरे दिन उत्तर प्रदेश मे सत्ता परिवर्तन के साथ ही शुरू हो गए थे। उनके द्वारा किए गए गैर कानूनी कामो की लोगो ने शिकायत करनी शुरू की और पुलिस हरकत मे आई और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। वह काफी समय तक जेल मे रहे। अब वह सुप्रीम कोर्ट से राहत लेकर बेल पर थे। इस दौरान उन्होने अपने को योगी सरकार द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होने अपनी प्रताड़ना को मुस्लिम प्रताड़ना से जोड़ने का प्रयास भी किया। अपने को प्रताड़ित पेश करके उन्होने मुस्लिम समुदाय की सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश की। खैर अब वह एक बार फिर से जेल पहुंच चुके है।
रामपुर की एक अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फतिमा और बेटे अब्दुल आजम को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के मामले मे दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाई है। उनके बेटे ने दो फर्जी जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त किए जिसके कागजी सबूत पुलिस ने अदालत मे पेश किए बताए जा रहे है। उन सबूतों के चलते अदालत के पास खान परिवार को सजा देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं था। इस सजा को न तो राजनैतिक द्वेष के साथ जोड़ा जा सकता है और न ही मुस्लिम प्रताड़ना के साथ। यह परिणाम है उस मानसिकता का जब लोकतंत्र मे राजनेता अपने को राजा समझने लगते है और नियम कानून को तोड़ना अपना अधिकार समझने लगते तो निश्चित तौर पर इस मानसिकता की मंजिल जेल ही है। इस सन्दर्भ मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अदित्यानाथ योगी का स्पष्टीकरण तर्क संगत है कि हम किसी को प्रताड़ित करने का इरादा नहीं रखते लेकिन कानून को भी अपना काम करने से नहीं रोकते। लोकतंत्र मे राजनेता जन सेवक है। वह अपने को राजा समझने की भूल कदाचित न करें और याद रखे कानून की चक्की धीमी चलती है लेकिन महीन पीसती है। #आज_इतना_ही।
