Editorial

*Editorial*क्या_आप_जानते_है_कि_भारत_मे-लोकपाल-है)* *mohinder Nath Sofat*

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30 अक्तूबर 2023- (#क्या_आप_जानते_है_कि_भारत_मे-लोकपाल-है)–

यादो के झरोखे से जब मे 2011 को याद करता हूँ तो मुझे अन्ना आन्दोलन की याद आती है। यह आन्दोलन मुख्य रूप से देश मे लोकपाल की नियुक्ती को लेकर लड़ा गया था। मीडिया ने इस आन्दोलन को जे पी आन्दोलन के बाद सबसे बड़े आन्दोलन की संज्ञा दी थी। उस समय अन्ना और उनके समर्थको ने देश को यह समझाने की कोशिश की थी कि देश मे व्याप्त भ्रष्टाचार को केवल लोकपाल के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। अन्ना हज़ारे का दिल्ली धरना हिट हुआ और हर कोई इसमे शामिल होना चाहता था। देश को यह समझा दिया गया था कि लोकपाल शक्तिशाली भ्रष्टाचारियो के लिए काल का काम करेगा, इसलिए इस आन्दोलन को जबरदस्त समर्थन मिला और कहा जाता है कि 2014 मे सत्ता परिवर्तन मे इस आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका थी। खैर आजादी के 72 साल बाद मार्च 2019 मे लोकपाल अस्तित्व मे आया और सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश पिनाकी चन्द्र घोष को भारत के पहले लोकपाल के रूप मे नियुक्त किया गया।

आज भ्रष्टाचार के खिलाफ ईडी और सी.बी.आई खूब सक्रिय दिखाई देती है और रोज मीडिया की सुर्खियां बटोर रही है, लेकिन लोकपाल क्या कर रहा है उसकी क्या भूमिका है किसी को कोई खबर नहीं है। अब तो लोग यह भी भूल गए है कि देश मे लोकपाल नियुक्त किया गया है। पिछले चार साल का लोकपाल के कार्यकाल का अवलोकन करने पर ध्यान मे आएगा कि लोकपाल का पिछला रिकॉर्ड बहुत ही खराब है। लोकपाल जिस पर निश्चित तौर पर करदाताओ के करोड़ो रूपए खर्च किए जा रहे होंगे जनता मे यह विश्वास पैदा करने मे भी असफल रहे है कि लोग उनके पास भ्रष्टाचार करने वाले बड़े मगरमच्छो के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाएं। लोकपाल का पद एक और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज को रोजगार देने का पद बन कर रह जाएगा। स्मरण रहे अन्ना हजारे आन्दोलन से निकल कर बनी आम आदमी पार्टी और उसके नेता अपने विरोधियों के खिलाफ प्रैस मे भ्रष्टाचार के आरोप तो लगाते है लेकिन लोकपाल के पास शिकायत दर्ज नहीं करते। मेरी समझ मे लोकपाल भी प्रदेशो मे नियुक्त लोकायुक्तो की तर्ज पर सफेद हाथी ही सबित होगा।


#आज_इतना_ही।

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