*विक्रमादित्य_हो_सकते_है_मंडी_संसदीय_क्षेत्र_के_कांग्रेसी_उम्मीदवार*



10 अप्रैल 2024- (#विक्रमादित्य_हो_सकते_है_मंडी_संसदीय_क्षेत्र_के_कांग्रेसी_उम्मीदवार)-
मीडिया रिपोर्ट पर यदि विश्वास करें तो मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार प्रतिभा सिंह के स्थान पर उनके बेटे विक्रमादित्य हो सकते है। यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर मंडी संसदीय सीट का चुनाव दिलचस्प होगा। साथ ही यह भी सन्देश जाएगा कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव को लेकर गंभीर है। भाजपा ने मंडी से कंगना रणौत को उतारा है, जो अभिनेत्री होने के साथ युवा है। वह युवाओं और महिलाओं को आकर्षित कर रही है। कांग्रेस का पहले निर्णय था कि वर्तमान विधायकों को चुनाव मे नहीं उतारा जाएगा। यह निर्णय हिमाचल मे हाल के घटनाक्रम के बाद लिया गया था क्योंकि सरकार की स्थिरता के लिए विधायकों का संख्या बल जरूरी था, लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकारों ने अपनी रणनीति इस तर्क के साथ बदल दी है कि अगर लोकसभा चुनाव जीतते है तो विधानसभा का उपचुनाव जीतना कतई मुश्किल नहीं होगा। मेरी समझ मे मंडी संसदीय सीट पर यह परिवर्तन निश्चित तौर पर चुनाव को कांटे की टक्कर बना देगा क्योंकि विक्रमादित्य सिंह 34 वर्ष के और यूथ आइकॉन के साथ उर्जावान भी है। ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि उनके साथ यंग वोटर जुडेंगें।
विक्रमादित्य यदि जीत हासिल कर लेते है तो निश्चित तौर पर कांग्रेस मे उनका कद्द बढ़ जाएगा और वह भविष्य के नेता होंगे। अगर वह पराजित होते है तो भी मंत्री बने रहेगें और अगर सरकार स्थिर रहती है तो भी उनके पास अपने को साबित करने का अवसर रहेगा। कांग्रेस के रणनीतिकार मंडी मे भाजपा को कड़ी चुनौती इसलिए भी खड़ी कर रहे है कि भले वहां से भाजपा उम्मीदवार सेलिब्रेटी कंगना है लेकिन जीत के लिए वह ठाकुर जय राम की लोकप्रियता पर निर्भर है। हिमाचल के अन्य भागों मे भी वर्तमान मे भाजपा के प्रादेशिक नेताओं मे विपक्ष के नेता की सर्वाधिक मांग है। कांग्रेस के रणनीतिकार चाहते है कि जय राम जी को मंडी मे ही बांध दिया जाए। मेरे विचार मे अगर विक्रमादित्य मंडी से चुनाव लड़ते है तो यह चुनाव कंगना के निमित जयराम बनाम विक्रमादित्य होगा। कभी यह क्षेत्र विक्रमादित्य के पिता स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी के प्रभाव का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन विधानसभा चुनाव मे विपक्ष के नेता ठाकुर जयराम ने मंडी जिला से 10 से 9 सीटें भाजपा को जीता कर अपने को मंडी के निर्विवाद नेता के रूप मे स्थापित कर लिया है। मेरी समझ मे मंडी का चुनाव केवल जीत हार के लिए ही नहीं लड़ा जाएगा अपितु यह चुनावी जंग यह भी तय करेगी आखिर मंडी का निर्विवाद नेता कौन है और वहां किसका प्रभुत्व कायम है।

#आज_इतना_ही।